नेपाल रेलवे का पांच वर्ष : आय से तीन गुना अधिक हो रहा है खर्च

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नेपाल रेलवे का पांच वर्ष : आय से तीन गुना अधिक हो रहा है खर्च


काठमांडू, 19 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल की एकमात्र रेलवे सेवा हर वर्ष घाटे में जा रही है। रेलवे कंपनी लिमिटेड के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की आय की तुलना में खर्च लगभग तीन गुना अधिक है। इसी कारण रेलवे सेवा दीर्घकालीन रूप से आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है।

कंपनी की व्यावसायिक कार्ययोजना के अनुसार, आर्थिक वर्ष 20२०/२१ से 20२४/२५ तक कुल 19 करोड़ 21 लाख रुपये की आय हुई, जबकि खर्च 67 करोड़ 37 लाख रुपये रहा। केवल पिछले आर्थिक वर्ष 20२४/२५ में ही 8 करोड़ 50 लाख रुपये की आय के मुकाबले 26 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च हुए, यह जानकारी कंपनी के महाप्रबंधक निरंजन झा ने दी।

उनके अनुसार, वर्तमान में मासिक आय करीब 75 लाख रुपये है, जबकि खर्च 1 करोड़ 29 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। आय से खर्च पूरा न होने के कारण कंपनी को सरकार की गारंटी पर ऋण लेकर संचालन करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया, “20२१ मार्च तक मूलधन और ब्याज सहित कुल ऋण 79 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिससे कंपनी पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बना है। हालांकि यात्री सेवा के दृष्टिकोण से रेलवे को प्रभावी माना गया है।”

महाप्रबंधक झा के अनुसार, भारत के जयनगर से जनकपुरधाम होते हुए महोत्तरी के बिजलपुरा तक संचालित रेल सेवा प्रतिदिन तीन बार चल रही है। घाटे के प्रमुख कारणों में भारतीय तकनीकी कर्मचारियों पर होने वाला अधिक खर्च भी शामिल है।

वर्तमान में यहां 17 भारतीय कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके लिए कंपनी भारतीय कोंकन कंपनी को हर महीने लगभग 1 करोड़ 12 लाख रुपये भुगतान करती है। वहीं, नेपाली पक्ष के 103 कर्मचारियों का कुल वेतन लगभग 17 लाख रुपये है।

नेपाल रेलवे कंपनी के अनुसार, स्थायी तकनीकी जनशक्ति की कमी, वर्कशॉप का अभाव, स्वदेशी चालक और स्टेशन मास्टर की कमी, तथा फ्यूलिंग स्टेशन न होने के कारण ईंधन भी भारत से लाना पड़ता है, जिससे संचालन लागत और बढ़ गई है। साथ ही, कंपनी लंबे समय से महाप्रबंधक के बिना चल रही है, जिससे प्रबंधन भी कमजोर हुआ है।

वि.सं. 1994 में शुरू हुई यह रेल सेवा 20१२ में ब्रॉड गेज विस्तार के लिए बंद कर दी गई थी। बाद में 20२१ से इसे पुनः संचालन में लाया गया और वर्तमान में यह सेवा 52 किलोमीटर तक विस्तार कर चुकी है।

कंपनी ने रेलवे की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न विकल्प प्रस्तावित किए हैं। रक्सौल स्थित 28 एकड़ जमीन को किराए पर देने से सालाना करीब 8 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान लगाया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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