नेपाल ने श्रम समझौता करने के लिए १६ देशों को भेजा प्रस्ताव, एक ने भी नहीं दिया जवाब

WhatsApp Channel Join Now
नेपाल ने श्रम समझौता करने के लिए १६ देशों को भेजा प्रस्ताव, एक ने भी नहीं दिया जवाब


काठमांडू, 19 मई (हि.स.)। नेपाल सरकार ने विदेशी रोजगार को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 16 देशों के साथ श्रम समझौता प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। युवा, श्रम तथा रोजगार मंत्रालय ने उन देशों को प्रस्ताव भेज दिया है, लेकिन अब तक किसी देश ने भी इसका जवाब नहीं दिया है।

मंत्रालय के प्रवक्ता पिताम्बर घिमिरे ने कहा कि 16 देशों को विदेश मंत्रालय के माध्यम से श्रम समझौते का प्रस्ताव भेजा गया है। ।हालांकि, अब तक किसी भी देश ने नेपाल के प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है। सरकार ने एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के देशों के साथ श्रम समझौता करने के उद्देश्य से प्रस्ताव भेजा है।

घिमिरे के मुताबिक मंत्रालय ने वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, अल्बानिया, ऑस्ट्रिया, तुर्की, माल्टा, मालदीव, सर्बिया, साइप्रस, लक्ज़मबर्ग, ब्रुनेई, पोलैंड, बोस्निया एंड हर्जेगोविना, क्रोएशिया और बेल्जियम को श्रम समझौते का प्रस्ताव भेजे हुए एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इनमें से किसी भी देश ने अब तक नेपाल के प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है।

वर्तमान में नेपाल का केवल 13 देशों के साथ द्विपक्षीय श्रम समझौता है, जबकि दुनिया के 170 से अधिक देशों में नेपाली श्रमिक कार्यरत हैं। बड़ी संख्या में नेपाली युवा ऐसे देशों में वैदेशिक रोजगार के लिए जाते हैं, जहां नेपाल का श्रम समझौता नहीं है। इससे आर्थिक ठगी और श्रम शोषण का खतरा बढ़ रहा है। इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार नए देशों के साथ श्रम समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इसके अलावा, विदेश रोजगार के लिए विभिन्न देशों में जाने वाले लगभग 48 प्रतिशत नेपाली नागरिक व्यक्तिगत श्रम स्वीकृति लेते हैं।

नेपाल के कानून में यह प्रावधान है कि नेपाल सरकार, कूटनीतिक संबंध स्थापित देशों की सरकारों के साथ संधि या समझौता कर, सरकारी निकायों या नेपाल सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली संस्थाओं के माध्यम से कामदार भेज सकती है। इन्हीं कानूनी प्रावधानों के आधार पर सरकार नेपाली कामदार जाने वाले देशों के साथ द्विपक्षीय श्रम समझौता और समझदारी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

मंत्रालय के प्रवक्ता घिमिरे ने कहा, “हम श्रम समझौते के लिए प्रस्ताव भेजे गए देशों के साथ लगातार फॉलोअप कर रहे हैं। उनकी ओर से प्रतिक्रिया आने का इंतजार है। जवाब क्यों नहीं आया, इस बारे में अभी कुछ कहना संभव नहीं है। श्रम समझौता करने की इच्छा के साथ ही प्रस्ताव भेजे गए हैं।”

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ के अध्यक्ष भुवनसिंह गुरूंग का कहना है कि श्रम समझौता श्रमिकों की कानूनी सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण आधार है। उनके अनुसार, जिन देशों में बड़ी संख्या में नेपाली कामदार जाते हैं या जाने की संभावना है, वहां श्रम समझौता बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा, “यदि रोजगारदाता या कंपनी द्वारा कामदारों के साथ अन्याय होता है, तो दोनों देशों की सरकारों के बीच समन्वय कर समाधान निकालना आसान हो जाता है। द्विपक्षीय समझौते से दक्ष नेपाली कामदारों को व्यवस्थित रूप से रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।”

गुरूंग का यह भी कहना है कि श्रमिकों को शोषण, कम वेतन और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों से बचाने के लिए प्रमुख श्रम गंतव्य देशों के साथ श्रम समझौता आवश्यक है। साथ ही, विदेश में समस्या आने पर सरकारी स्तर पर सहायता और सहजीकरण करने में भी श्रम समझौते महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

Share this story