नेपाल पुलिस ने मांगा फोन रिकॉर्डिंग का अधिकार

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नेपाल पुलिस ने मांगा फोन रिकॉर्डिंग का अधिकार


काठमांडू, 12 अगस्त (हि.स.)। नेपाल पुलिस ने अपराध अनुसंधान के उद्देश्य से सरकार से ‘कॉल इंटरसेप्शन’ यानी फोन कॉल को रियल टाइम में सुनने का अधिकार देने की मांग की है। यह अधिकार मिलने के बाद पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों की फोन पर होने वाली बातचीत को तत्काल सुन और रिकॉर्ड कर सकेगी।

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभिनारायण काफ्ले ने बताया कि पुलिस की रणनीतिक योजना में कॉल इंटरसेप्शन को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में संलिप्त या फरार आरोपियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की जानकारी हासिल करने के लिए उनकी बातचीत की निगरानी आवश्यक हो सकती है।

काफ्ले के अनुसार, “जो व्यक्ति जघन्य अपराध में शामिल हैं या फरार हैं, वे किससे और क्या बातचीत कर रहे हैं, यह सुनना जरूरी हो सकता है।” उन्होंने कहा कि पुलिस की जांच को तकनीक-अनुकूल और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से रणनीतिक योजना तैयार कर उसे गृह मंत्रालय के समक्ष पेश किया गया है।

नेपाल में फोन इंटरसेप्शन का अधिकार देने का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले देश की एकमात्र खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग को यह अधिकार देने का प्रयास किया जा चुका है।

तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान वर्ष 2019 में राष्ट्रीय सभा में दर्ज ‘नेपाल विशेष सेवा विधेयक’ में पहली बार इस तरह का प्रावधान शामिल किया गया था। वर्ष 2020 में राष्ट्रीय सभा ने विधेयक पारित कर इसे प्रतिनिधि सभा में भेज दिया था।

हालांकि, नागरिकों की गोपनीयता के अधिकार के उल्लंघन की आशंका को लेकर इसका व्यापक विरोध हुआ। विरोध के बाद विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया गया।

बाद में ओली नेतृत्व वाली सरकार के ही कार्यकाल में वर्ष 2025 में नागरिकों के फोन कॉल, मैसेज, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की निगरानी, अनुवीक्षण तथा टैपिंग की अनुमति देने वाले प्रावधानों सहित एक नया विधेयक लाने की कोशिश की गई थी।

विधेयक के मसौदे में यह व्यवस्था प्रस्तावित थी कि यदि किसी अन्य माध्यम से सूचना जुटाना संभव न हो और सूचना तत्काल प्राप्त नहीं करने पर देश को नुकसान पहुंचने की आशंका हो, तो संबंधित महानिरीक्षक की संतुष्टि के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति या संस्थाओं की बातचीत की निगरानी की जा सकती है।

मसौदे के अनुसार, संचार माध्यमों या अन्य माध्यमों से होने वाली बातचीत, ऑडियो-वीडियो सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक संकेत या विवरण की निगरानी, अनुवीक्षण या इंटरसेप्शन किया जा सकता था। इसके लिए संबंधित महानिरीक्षक अपने प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में अधीनस्थ अधिकारियों को लिखित आदेश देने का अधिकार रखता।

अब नेपाल पुलिस द्वारा स्वयं अपराध अनुसंधान के लिए कॉल इंटरसेप्शन का अधिकार मांगे जाने के बाद नागरिकों की निजता और पुलिस जांच की जरूरत के बीच संतुलन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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