नेपाल के विपक्षी दल संसद में सरकार के खिलाफ और अधिक आक्रामक होंगे
काठमांडू, 24 मई (हि.स.)। नेपाल के विपक्षी दलों ने संसद में सरकार के खिलाफ अधिक आक्रामक रुख अपनाने का निर्णय लिया है। विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह पर संसद की अनदेखी करने और सांसदों के प्रति जवाबदेह न रहने का आरोप लगाया है।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के संसदीय दल कार्यालय, सिंहदरबार में विपक्षी दलों के मुख्य सचेतकों की बैठक में फैसला लिया गया कि आने वाले दिनों में संसद में विरोध प्रदर्शन और तेज किया जाएगा। बैठक के बाद यूएमएल के मुख्य सचेतक ऐनबहादुर महर ने कहा कि सरकार के कामकाज, संसद के प्रति उसके उपेक्षापूर्ण रवैये और स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल की भूमिका पर गंभीर चर्चा हुई। महर के अनुसार बैठक में विपक्षी दलों ने संसद में असहमति की आवाज़ को दबाने और विपक्ष की चिंताओं को दरकिनार कर आगे बढ़ने के प्रयासों पर भी चर्चा की। विपक्ष ने इसे संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
बैठक में शामिल नेताओं ने यह चिंता भी जताई कि स्पीकर अर्याल अब भी निष्पक्ष स्पीकर से अधिक राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के नेता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के कार्यान्वयन तथा संसदीय नियम और प्रक्रियाओं को कायम रखने के लिए आने वाले दिनों में आपसी समन्वय और सहयोग जारी रखने पर भी सहमति जताई। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने कहा कि बैठक में प्रधानमंत्री शाह द्वारा संसद की लगातार अनदेखी करने और विपक्ष के विरोध तथा चिंताओं पर प्रतिक्रिया न देने के विषय पर गंभीर चर्चा हुई।
इस बैठक में नेपाली कांग्रेस की प्रमुख सचेतक वासना थापा, यूएमएल के मुख्य सचेतक ऐनबहादुर महर, एनसीपी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी की मुख्य सचेतक खुश्बु ओली शामिल थे। प्रधानमंत्री शाह और उनकी सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल होने के बावजूद श्रम संस्कृति की ओर से बैठक में कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

