नेपाल में संविधान संशोधन कार्यदल से विपक्ष का बहिष्कार, बहस प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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नेपाल में संविधान संशोधन कार्यदल से विपक्ष का बहिष्कार, बहस प्रक्रिया पर उठाए सवाल


नेपाल में संविधान संशोधन कार्यदल से विपक्ष का बहिष्कार, बहस प्रक्रिया पर उठाए सवाल


काठमांडू, 09 जुलाई (हि.स.)। नेपाल में गठित संविधान संशोधन बहस-पत्र तैयार करने वाले कार्यदल से चार राजनीतिक दलों ने खुद को अलग कर लिया है।

मंत्रिपरिषद की बैठक ने ३० मार्च को हुई संविधान संशोधन पर बहस-पत्र तैयार करने के लिए इस कार्यदल के गठन का निर्णय लिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार असीम शाह को इसका संयोजक बनाया गया था। इस कार्यदल से प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस सहित अन्य सभी प्रमुख दलों ने बहिष्कार कर दिया है। नेपाली कांग्रेस के अलावा यूएमएल, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी, जनता समाजवादी पार्टी, लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनमोर्चा के प्रतिनिधियों ने कार्यदल से इस्तीफा दे दिया है।

इन दल के नेताओं ने संयोजक असीम शाह को संबोधित पत्र देकर कार्यदल छोड़ने की जानकारी दी। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि संविधान संशोधन पर आगे बढ़ना है तो सबसे पहले बहस-पत्र तैयार करने की मौजूदा प्रक्रिया को ही रद्द किया जाना चाहिए। विपक्षी दलों ने संयुक्त बयान में कहा है कि संविधान की प्रस्तावना तथा उसके मूल सिद्धांतों और आधारभूत मूल्यों से जुड़े अनुच्छेदों एवं उपधाराओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा, इस संबंध में सरकार को स्पष्ट प्रतिबद्धता व्यक्त करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की कि जिन प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित है, उनके कारणों पर पहले संघीय संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी दलों के नेताओं की सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और सरकार राष्ट्रीय सहमति बनाने की पहल करे।

प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार असीम शाह के नेतृत्व वाला कार्यदल अपनी रिपोर्ट तैयार करने के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दूसरी बार बढ़ाई गई समयसीमा के भीतर यह रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री बालेन शाह को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

प्रधानमंत्री सचिवालय ने यह भी स्वीकार किया है कि कार्यदल के कुछ सदस्य बीच में ही अलग हो गए हैं। सचिवालय ने कहा कि कार्यदल के संयोजक के अधिकतम प्रयासों के बावजूद अंत तक इस प्रक्रिया में शामिल रहे विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए कार्यदल छोड़ने का पत्र सौंपकर खुद को अलग कर लिया। प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार इन चारों दलों के प्रतिनिधि कार्यदल में 83 दिनों तक सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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