नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व गृहमंत्री लेखक को जमानत पर रिहा किया गया

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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व गृहमंत्री लेखक को जमानत पर रिहा किया गया


काठमांडू, 09 अप्रैल (हि.स.)। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने जमानत पर रिहा कर दिया है।

काठमांडू पुलिस एसएसपी रमेश थापा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जमानत पर रिहा करके ओली को उनकी पत्नी राधिका शाक्य और लेखक को उनकी पत्नी यशोदा लेखक के जिम्मे सौंप दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि ओली की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जांच प्रक्रिया को जल्द पूरा करना उचित होगा। दोनों नेताओं को पुलिस ने 28 मार्च को गिरफ्तार किया था।

ओली और लेखक की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सोमवार को काठमांडू अदालत से बढ़ाई गई 5 दिन की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। न्यायाधीश विनोद शर्मा और सुनिलकुमार पोखरेल की पीठ ने हिरासत को “कानून के विपरीत नहीं” माना, लेकिन निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर यह निर्णय लेने का निर्देश दिया कि मामला चलाया जाए या नहीं।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि उस अवधि में निर्णय नहीं हो पाता है, तो तीसरी बार बढ़ाई गई अवधि के बाद मुलुकी फौजदारी संहिता की धारा 15 की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें रिहा कर आगे की जांच जारी रखी जाए। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ओली और लेखक के बयान तथा अन्य जांच प्रक्रियाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। साथ ही, जांच आयोग द्वारा सिफारिश किए गए तत्कालीन काठमांडू प्रमुख जिला अधिकारी छविलाल रिजाल को भी आवश्यकता पड़ने पर उपस्थित होने की शर्त पर छोड़ा गया है।

बालेंद्र शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद मंत्रिपरिषद् ने गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग की रिपोर्ट लागू करने का निर्णय लिया था, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई थी। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 8 सितंबर 2025 को गोलीबारी से लोगों की मौत होने के बाद भी तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली सहित संबंधित पदाधिकारियों ने गोली रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए और लापरवाही दिखाई।

इसी आधार पर ओली और लेखक के खिलाफ मुलुकी फौजदारी संहिता की धारा 181 और 182 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इन धाराओं के अनुसार लापरवाही या असावधानी से किसी की मृत्यु होने पर 3 से 10 वर्ष तक की कैद और 30 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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