नेपाल-भारत के बीच हुए जैविक विविधता संरक्षण संबंधी द्विपक्षीय समझौता पर हस्ताक्षर

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नेपाल-भारत के बीच हुए जैविक विविधता संरक्षण संबंधी द्विपक्षीय समझौता पर हस्ताक्षर


काठमांडू, 26 फरवरी (हि.स.)। नेपाल और भारत के बीच जैविक विविधता संरक्षण संबंधी द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

भारतीय दूतावास की तरफ से गुरुवार को जानकारी दी गई कि नई दिल्ली में नेपाल के वन तथा वातावरण मंत्री माधवप्रसाद चौलागाईं और भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में यह करार हुआ। समझौते पर नेपाल की ओर से राजदूत डॉ. शंकरप्रसाद शर्मा तथा भारत की ओर से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों देशों के उच्च पदस्थ अधिकारी भी उपस्थित थे।

नेपाल वन मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. महेश्वर ढकाल ने बताया कि नेपाल और भारत संयुक्त राष्ट्र अंतर्गत जैविक विविधता सहित विभिन्न पर्यावरण संरक्षण संबंधी अंतरराष्ट्रीय संधियों के पक्षकार राष्ट्र हैं। दोनों देशों की साझा सीमा से जुड़े क्षेत्रों में संरक्षित क्षेत्र और जैविक कॉरिडोर मौजूद हैं, जहां हाथी, गैंडा और बाघ सहित कई वन्यजन्तु स्वतंत्र और निर्बाध रूप से सीमा पार आवागमन करते हैं। इस समझौते के माध्यम से दोनों देश संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन, जैविक विविधता संरक्षण, वन्यजन्तु अपराध नियंत्रण, साझा रणनीति अपनाने तथा क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की क्षमता विकास में समन्वय और सहयोग बढ़ाने की अपेक्षा कर रहे हैं।

वन मंत्री चौलागाईं के अनुसार यह समझौता सीमा पार क्षेत्रों में वन्यजन्तु चोरी-शिकार और अवैध व्यापार के नियंत्रण, अध्ययन-अनुसंधान और निगरानी को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जनचेतना और क्षमता विकास में भी सहायक होगा। समझौते के कार्यान्वयन से सीमा क्षेत्रों में नियमित गश्ती और बैठकों के आयोजन, अनुभव और ज्ञान के आदान-प्रदान, श्रेष्ठ प्रथाओं के विकास और विस्तार तथा वन्यजन्तु एवं अवैध व्यापार संबंधी सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों की जैविक विविधता संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

नेपाल की ओर से इस समझौते के क्रियान्वयन के लिए केंद्र स्तर पर मंत्रालय तथा उसके अधीन वन तथा भू-संरक्षण विभाग और राष्ट्रीय निकुञ्ज तथा वन्यजन्तु संरक्षण विभाग कार्य करेंगे। स्थानीय स्तर पर संबंधित प्रदेशों के वन तथा वातावरण मंत्रालय, संरक्षित क्षेत्र और डिविजनल वन कार्यालय समन्वय और सहयोग करेंगे। समझौते के अनुसार जब तक किसी एक पक्ष द्वारा कूटनीतिक माध्यम से लिखित सूचना देकर इसे समाप्त नहीं किया जाता, यह समझौता प्रत्येक पाँच वर्ष में स्वतः नवीनीकृत होगा तथा हर तीन वर्ष में इसकी समीक्षा की जाएगी। कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न किसी भी समस्या का समाधान आपसी समझदारी से किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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