नेपाल सरकार की दस देशों में अपने दूतावास बंद करने की तैयारी, भारत में बनेंगे दो नए वाणिज्य दूतावास

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नेपाल सरकार की दस देशों में अपने दूतावास बंद करने की तैयारी, भारत में बनेंगे दो नए वाणिज्य दूतावास


नेपाल सरकार की दस देशों में अपने दूतावास बंद करने की तैयारी, भारत में बनेंगे दो नए वाणिज्य दूतावास


काठमांडू, 01 मई (हि.स.)। नेपाल सरकार राजनयिक और प्रशासनिक सुधारों के तहत दस देशों में अपने दूतावासों को बंद करने या उनके पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए विदेश मंत्री शिशिर खनाल मंत्रालय के व्यापक पुनर्गठन को लेकर कूटनीतिज्ञों और विशेषज्ञों से राय-सुझाव ले रहे हैं।

विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि सरकार कुछ दूतावास बंद करने और आवश्यकता के अनुसार नए दूतावास खोलने के विषय में आंतरिक चर्चा कर रही है। वर्तमान में नेपाल के 34 दूतावास और 10 महावाणिज्य दूतावास सहित कुल 44 विदेशी मिशन संचालित हैं।

सरकार का मानना है कि अतीत में राजनीतिक हिस्सेदारी और कार्यकर्ताओं को राजदूत नियुक्त करने के उद्देश्य से कई अनावश्यक दूतावास खोले गए थे। इसी कारण लगभग 10 दूतावासों को बंद करने की तैयारी की जा रही है।

विदेश मंत्री ने बताया कि मंत्रालय के पुनर्गठन का खाका तैयार करने का निर्देश दिया है। इसमें विदेश स्थित नेपाली मिशनों की समीक्षा भी शामिल है। लगभग 8 से 10 दूतावास बंद करने की योजना बनाई जा रही है।”

विदेश मंत्रालय के मुताबिक डेनमार्क, फिनलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रिया, स्पेन, म्यांमार, मिस्र, कनाडा और ब्राजील स्थित नेपाली दूतावास बंद करने पर विचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि इन देशों से संबंधित काम पास के अन्य दूतावासों के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। इसी तरह स्विट्जरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका स्थित नेपाली दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर कामकाज को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे सरकार का खर्च कम होगा।

विदेश मंत्रालय का मानना है कि डिजिटल और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के कारण कई महावाणिज्य दूतावासों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। उनके अनुसार, नेपाल को केवल 20 से 22 देशों में ही दूतावास रखने की जरूरत है।

भारत के संदर्भ में विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि नई दिल्ली में नेपाली दूतावास और कोलकाता में महावाणिज्य दूतावास होने के बावजूद मुंबई और बेंगलुरु में भी महावाणिज्य दूतावास की आवश्यकता है। उनके अनुसार, इन शहरों में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक रहते हैं और दोनों शहर प्रमुख व्यापारिक केंद्र भी हैं, जहां के महावाणिज्य दूत व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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