विदेश मंत्री ने कहा- नेपाल कूटनीतिक माध्यम से भारत के साथ सीमा का समाधान करने के पक्ष में

काठमांडू, 06 मई (हि.स.)। नेपाली सौ के नोट पर भारतीय इलाकों वाला विवादित नक्शा छापने के मुद्दे पर विदेश मंत्री नारायणकाजी श्रेष्ठ ने कहा है कि नेपाल कूटनीतिक माध्यम के जरिए ही भारत से सीमा समस्या का समाधान करने के पक्ष में है।

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने नेपाल के इस ताजा निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इससे जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती है। जब विभिन्न कूटनीतिक चैनल में इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है तो ऐसे में नेपाल का यह फैसला अप्रत्याशित है। भारतीय विदेश मंत्री के बयान के बाद आज नेपाली संसद की अन्तरराष्ट्रीय संबंध समिति ने नेपाल के विदेश मंत्री नारायणकाजी श्रेष्ठ से जवाब तलब किया था।

सांसदों ने विदेश मंत्री श्रेष्ठ से पूछा कि आखिर जब भूमि विवाद पर कूटनीतिक वार्ता चल रही है तो ऐसे में नेपाल ने अपने नोट पर विवादित नक्शे को छापने का निर्णय क्यों लिया? सांसदों ने विदेश मंत्री से यह भी जानना चाहा कि क्या नेपाल के इस एकतरफा फैसले से कूटनीतिक वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ेगा ? सांसदों के सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री श्रेष्ठ ने कहा कि नेपाल भी चाहता है कि दोनों देशों के बीच रहे सीमा समस्या पर कूटनीतिक वार्ता के जरिए ही समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल ने अपनी तरफ से विभिन्न स्तर पर इन विषयों को उठाया है।

उन्होंने सांसदों को आश्वस्त करते हुए कहा कि नेपाल के सौ रुपये के नोट में अब तक पुराना नक्शा ही अंकित रहता था। चूंकि, नेपाल के संविधान ने जब नए नक्शे को अंगीकार करने का सर्वसम्मत से फैसला किया है तो ऐसे में नेपाल राष्ट्र बैंक की तरफ से आए प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और भारत को भी इसे सामान्य तरीके से लेना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार/पंकज दास/सुनीत

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