नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए अस्थायी आवास का सर्वे शुरू, एक हफ्ते में रिपोर्ट आने की उम्मीद
काठमांडू, 10 सितंबर (हि.स.)। नेपाल में बाढ़ से विस्थापित लोगों के लिए सरकार ने अस्थायी आवास की जरूरत का आकलन शुरू कर दिया है।
प्रभावित जिलों में हजारों लोग अभी भी आपातकालीन होल्डिंग सेंटरों में रह रहे हैं। सरकार यह पता लगाने के लिए सर्वे कर रही है कि वास्तव में कितने लोगों और परिवारों को अलग से अस्थायी आवास की जरूरत है।
शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग के उपमहानिदेशक और बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय द्वारा गठित पुनर्वास एवं आश्रय प्रबंधन कार्यदल के संयोजक प्रकाश आर्याल के मुताबिक, होल्डिंग सेंटरों में रह रहा हर व्यक्ति अलग अस्थायी आवास का जरूरतमंद हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
स्थानीय सरकार के माध्यम से यह सर्वे किया जा रहा है। इसके तहत अस्थायी आवास की जरूरत वाले लोगों और परिवारों की संख्या का विवरण जुटाया जा रहा है।
आर्याल ने कहा, “होल्डिंग सेंटरों में रह रहे सभी लोगों को अस्थायी आवास की जरूरत हो, यह जरूरी नहीं है।”
सरकार फॉर्म के जरिए आवश्यक जानकारी एकत्र कर रही है। इसके बाद सरकार उपयुक्त स्थानों की पहचान कर अस्थायी आवास का निर्माण शुरू करेगी। यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय सरकारों के समन्वय में आगे बढ़ाई जाएगी।
नुवाकोट के गल्छी और बिदुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अस्थायी आवास के लिए जमीन की पहचान का काम पहले ही शुरू हो चुका है।
प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय के मुताबिक, विभिन्न जिलों के होल्डिंग सेंटरों में रह रहे बाढ़ प्रभावितों को उनकी पसंद के अनुसार अस्थायी आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
फिलहाल होल्डिंग सेंटरों का इस्तेमाल आपातकालीन आश्रय के तौर पर किया जा रहा है। वहां रह रहे प्रभावित परिवारों को अलग-अलग अस्थायी आवास में स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं, स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया सरकार द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन करने और पुनर्निर्माण योजना तैयार करने के बाद ही शुरू होगी।
शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग की टीमें मंगलवार से ही प्रभावित जिलों में भेजी गई हैं, जो नुकसान का आकलन कर रही हैं।
सर्वे के दौरान प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों से जुड़ी कई जानकारियां जुटाई जाएंगी। इनमें घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है या नहीं, परिवार के कितने सदस्यों की मौत हुई है या कितने अभी लापता हैं, तथा परिवार सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अस्थायी आवास में रहना चाहता है या किराए के मकान में—इसकी जानकारी शामिल होगी।
इसके अलावा परिवार के पास अपनी जमीन है या नहीं, वे कहां स्थानांतरित होना चाहते हैं और उन्हें पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य जरूरी सेवाओं की क्या आवश्यकता है, इसका भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
विभाग को उम्मीद है कि यह सर्वे एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
सरकार उन प्रभावित परिवारों का भी सर्वे करने की योजना बना रही है, जो फिलहाल होल्डिंग सेंटरों में नहीं रह रहे हैं। व्यापक आकलन पूरा होने के बाद अस्थायी आवास निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। रसुवा में आई बाढ़ ने कई परिवारों के घरों के साथ-साथ उनकी जमीन भी बहा दी है। ऐसे में कुछ प्रभावित परिवारों के पास वापस लौटने के लिए सुरक्षित जगह तक नहीं बची है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

