नेपाल में संसदीय चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से इस्तीफा देने की होड़, राजनीतिक हलचल तेज

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नेपाल में संसदीय चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से इस्तीफा देने की होड़, राजनीतिक हलचल तेज


काठमांडू, 23 फरवरी (हि.स.)। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) में इस्तीफों से राजनीतिक हलचल मच गई है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता उम्मीदवार चयन में भेदभाव तथा वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं।

असंतोष की शुरुआत 12 फरवरी को डॉ. प्रणय शमशेर राणा के इस्तीफे से हुई। उन्होंने पार्टी की आंतरिक ‘प्राइमरी’ प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्राइमरी के नाम पर 25 हजार रुपये शुल्क लिया गया, लेकिन बाद में विशेष परिस्थितियों का हवाला देकर विधि को दरकिनार करते हुए उम्मीदवारों का चयन किया गया। राणा ने कहा कि शुरुआत में पार्टी का नारा सुशासन और जवाबदेही था, लेकिन अव्यवस्था समाप्त कर व्यवस्था स्थापित करने का दावा उल्टा पड़ गया। उन्होंने प्रवासी नेपाली समुदाय को 10 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के आश्वासन को भी 'घोटाला' बताते हुए आरोप लगाया कि अंतिम बंद सूची में इसका कोई प्रतिबिंब नहीं दिखा। इस्तीफे के दो सप्ताह बाद वे नेपाली कांग्रेस में शामिल हो गए।

आरएसपी के मकवानपुर जिले के संस्थापक अध्यक्ष भरत पराजुली ने सोमवार को ही पार्टी से त्यागपत्र देटे हुए नेपाली कांग्रेस का दामन थाम लिया। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन शाह पर मनमानी करने पार्टी विधान के विपरीत निर्णय करने का आरोप लगाया। इसी तरह नुवाकोट में नेता अशोक कुमार थापा ने आंतरिक गतिविधियों से असंतोष जताते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने संगठन निर्माण में लगे लोगों की उपेक्षा का आरोप लगाया।

इसी तरह नवलपरासी जिले के उपाध्यक्ष गुपसेन ठाकुरी और बरदघाट के अध्यक्ष जीत बहादुर हरिजन ने भी पार्टी छोड़ दी। यहां विक्रम खनाल को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद असंतोष बढ़ा। पूर्व चुनाव में 12,499 मत प्राप्त करने वाले महेंद्र सेन (ठाकुरी) टिकट के दावेदार थे। सेन के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद खनाल को उम्मीदवार बनाए जाने से विद्रोह भड़क उठा।

कैलाली में धनगढी उपमहानगरपालिका के संस्थापक नगर अध्यक्ष ईश्वरी बिष्ट ने सामान्य सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। ऐसे ही बारा जिल में संगठन विभाग प्रमुख पवन चौधरी ने पिछले हफ्ते ही पार्टी छोड़ी। उन्होंने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर असंतोष जताया। जिला अध्यक्ष चंदन स्वर्णकार के अनुसार, चौधरी ने प्राइमरी में भाग लेने के लिए 25,000 रुपये जमा किए थे, लेकिन अंतिम चयन में प्रक्रिया उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया।

बागमती प्रदेश के उपाध्यक्ष दिनेश हुमागाईं ने भी नेतृत्व पर नैतिक विचलन और निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ “नौकर जैसा व्यवहार” करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने सदस्यता और उम्मीदवार आवेदन शुल्क का हिसाब सार्वजनिक न करने पर भी सवाल उठाया।

मधेश प्रदेश की संस्थापक प्रदेश अध्यक्ष ममता शर्मा ने 18 फरवरी को पार्टी छोड़कर नेपाली कांग्रेस का दामन थाम लिया। जनकपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उनका स्वागत नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा ने किया। शर्मा ने पार्टी में “दागी व्यक्तियों के बढ़ते प्रभाव” को इस्तीफे का कारण बताया।

केंद्रीय वित्त विभाग के सदस्य दिनेश आचार्य ने भी पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने की भाषण शैली पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि क्रोध और प्रतिशोध से प्रेरित अभिव्यक्तियां पार्टी की वैचारिक नींव को कमजोर कर रही हैं।

देशव्यापी चुनाव अभियान तेज होने के बीच इस्तीफों की यह श्रृंखला आरएसपी की संगठनात्मक मजबूती पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है और आगामी चुनाव से पहले पार्टी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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