पूर्व प्रधान न्यायाधीश को आधी रात में घर से गिरफ्तार करने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, कहा- उचित प्रक्रिया का पालन जरूरी
काठमांडू, 28 सितंबर (हि.स.)। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा को गिरफ्तार कर 10 घंटे तक पुलिस कार्यालय में रखने की घटना पर गंभीर ध्यानाकर्षण जताया है।
प्रधान न्यायाधीश डॉ. मनोज कुमार शर्मा द्वारा सोमवार को बुलाई गई आपातकालीन पूर्ण बैठक (फुल कोर्ट) में आधी रात को पूर्व प्रधान न्यायाधीश जबरा को घर में सोते समय उठाकर ले जाने की घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण बैठक (फुल कोर्ट) में बनी धारणा को अदालत के प्रवक्ता अर्जुनप्रसाद कोइराला ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए सार्वजनिक किया।
विज्ञप्ति में कहा गया है, “आधी रात को पूर्व प्रधानन्यायाधीश को नेपाल पुलिस के अधिकारियों द्वारा घर में सो रहे अवस्था में उठाकर काठमांडू अपराध अनुसन्धान कार्यालय, टेकु ले जाने और करीब 10 घंटे तक वहां रखने के बाद फिर परिवार के जिम्मे लगाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण बैठक का गंभीर ध्यानाकर्षण हुआ है।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेपाल का संविधान स्वतंत्र, निष्पक्ष और सक्षम न्यायपालिका को लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के बुनियादी मूल्यों में शामिल करता है। पूर्व प्रधानन्यायाधीश, पूर्व न्यायाधीश, मौजूदा न्यायाधीश और न्यायिक कर्मचारी स्वतंत्र न्यायपालिका के अभिन्न अंग हैं। इसलिए न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रति राज्य के निकायों का व्यवहार हमेशा संवेदनशील और गंभीर विषय होता है।
विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि प्रत्येक नेपाली नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए कानून में निर्धारित उचित प्रक्रिया अपनाकर ही किसी व्यक्ति को नियंत्रण में लिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “कानून में निर्धारित उचित प्रक्रिया पूरी किए बिना की जाने वाली कार्रवाई में मनमानेपन की प्रचुर संभावना रहती है। ऐसी कार्रवाई को लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्वीकार नहीं कर सकती—यह हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता है।”
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

