बाढ़ के कारण रसुवागढी–केरुंग सीमा नाका बंद होने के बाद चीन ने तातोपानी नाका भी बंद किया

WhatsApp Channel Join Now
बाढ़ के कारण रसुवागढी–केरुंग सीमा नाका बंद होने के बाद चीन ने तातोपानी नाका भी बंद किया


काठमांडू, 16 सितंबर (हि.स.)। नेपाल-चीन के प्रमुख व्यापारिक नाके रसुवागढी–केरुंग के बाढ़ के कारण बाधित होने के बीच एक अन्य महत्वपूर्ण सीमा नाका तातोपानी के संचालन को भी बंद कर दिया गया है। चीन की ओर से नाका कब खोला जाएगा, इसकी जानकारी नेपाल को नहीं दी गई है।

रसुवागढी–केरुंग नाका बंद होने के तुरंत बाद चीन ने नेपाल को पत्र भेजकर तातोपानी नाका भी अस्थायी रूप से बंद करने की जानकारी दी थी। हालांकि, नाका बंद करने का कारण चीनी पक्ष ने स्पष्ट नहीं किया है।

ल्हासा स्थित नेपाली महावाणिज्य दूत लक्ष्मीप्रसाद निरौला ने बताया कि उन्हें तातोपानी नाका बंद किए जाने का कारण और इसे दोबारा खोलने की तारीख की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि रसुवागढ़ी नाका बंद होने के बाद केरुंग में फंसे नेपाली पर्यटकों और मालवाहक कंटेनरों को तातोपानी तथा कोरला नाके के रास्ते नेपाल लाने के लिए चीन से अनुरोध किया गया था। पर्यटकों को तातोपानी नाके से लौटने की अनुमति दी गई, लेकिन मालवाहक कंटेनरों को अनुमति नहीं मिली।

निरौला के अनुसार, रसुवागढी नाका बंद होने की स्थिति में यदि तातोपानी और कोरला दोनों नाकों का इस्तेमाल किया जा सके तो नेपाल-चीन व्यापार को काफी सुविधा होगी। इसके लिए चीन से औपचारिक अनुरोध किया गया है, लेकिन तातोपानी नाका खोलने के संबंध में अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

चीन ने 31 अगस्त को पत्र भेजकर तातोपानी नाका अस्थायी रूप से बंद करने की जानकारी दी थी। इस बीच, 4 सितंबर को चाइना डेली ने खबर दी थी कि चीन नेपाल के साथ प्रमुख स्थल व्यापारिक नाका झांगमु में सीमा जांच और सीमा शुल्क से संबंधित व्यवस्थाओं में बदलाव करने जा रहा है।

स्थानीय सरकार के अनुसार, उच्च हिमाली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और यात्रियों तथा उनके सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमा जांच व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। झांगमु नाका शिगात्से के अंतर्गत सिजांग स्वायत्त क्षेत्र के न्यालाम में स्थित है।

नई व्यवस्था के तहत नेपाल-चीन सीमा पार करने वाले यात्रियों को केवल निर्धारित मार्गों से ही आवागमन की अनुमति होगी। वे निर्धारित क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेंगे और रास्ते में अपनी इच्छा से वाहन में चढ़ने-उतरने या निर्धारित स्थान के अलावा अन्य लोगों से संपर्क करने पर भी रोक होगी।

बिना अनुमति नियंत्रित सड़क खंडों पर वाहन रोकने, यात्रियों को चढ़ाने-उतारने तथा माल लोड या अनलोड करने की भी अनुमति नहीं होगी। सीमा क्षेत्र से संबंधित नहीं होने वाले लोगों और वाहनों को भी उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

तातोपानी सीमा शुल्क कार्यालय के प्रमुख दीपेन्द्र प्रकाश गिरी ने बताया कि 8 सितंबर से तातोपानी नाके से मालवाहक कंटेनरों की क्लीयरेंस नहीं हुई है। हालांकि, यात्री वाहनों को आने-जाने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने भी नाका बंद किए जाने का कारण स्पष्ट जानकारी में नहीं होने की बात कही।

रसुवागढी नाका बाधित होने और तातोपानी नाका बंद होने के बाद नेपाल-चीन के स्थल व्यापार के लिए फिलहाल मुस्तांग के कोरला नाके का इस्तेमाल किया जा रहा है।

हालांकि, कोरला नाका काठमांडू से रसुवागढी और तातोपानी की तुलना में काफी दूर है। कोरला से काठमांडू की दूरी करीब 481 किलोमीटर, काठमांडू-तातोपानी करीब 124 किलोमीटर और काठमांडू-रसुवागढी करीब 160 किलोमीटर है। इसके अलावा कोरला से केरुंग की दूरी करीब 600 किलोमीटर है।

नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के सचिव भक्त पराजुली के अनुसार, दूरी, लागत, समय और बुनियादी ढांचे समेत कई कारणों से चीन के साथ व्यापार के लिए तातोपानी नाका कोरला की तुलना में अधिक सुविधाजनक है।

उन्होंने बताया कि केरुंग से कोरला पहुंचने में ही करीब एक दिन लगता है। पर्याप्त बुनियादी ढांचे और जनशक्ति की कमी के कारण सीमा शुल्क की प्रक्रिया भी एक दिन में पूरी नहीं हो पाती। इसके बाद सड़क की स्थिति और वाहनों के कारण काठमांडू तक सामान पहुंचने में करीब तीन दिन और लगते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ जाती है।

कोरला नाके के रास्ते काठमांडू तक सामान पहुंचाने में करीब एक सप्ताह लग सकता है, जबकि तातोपानी नाका खुला होने पर चीन के खासा से काठमांडू तक सामान करीब एक दिन में पहुंचाया जा सकता है।

कोरला नाके पर चीन की ओर अत्याधुनिक सीमा शुल्क कार्यालय का निर्माण किया गया है, लेकिन नेपाल की ओर आवश्यक बुनियादी ढांचा अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। कोरला नाके से करीब 10–12 किलोमीटर दूर नेचुड़ में सीमा शुल्क कार्यालय है। फिलहाल, कर्मचारी अस्थायी संरचना में दिनभर सीमा शुल्क की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शाम को नेचुड़ लौटते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

Share this story