नेपाल में मतदान से 72 घंटे पहले भारत और चीन से लगी सीमा बंद करने का फैसला

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नेपाल में मतदान से 72 घंटे पहले भारत और चीन से लगी सीमा बंद करने का फैसला


काठमांडू, 25 फ़रवरी (हि.स.)। नेपाल में संसदीय चुनावों को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से भारत और चीन से लगी सीमा को तीन दिनों के लिए पूर्णतः बंद रखने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की अध्यक्षता में आज सिंहदरबार में हुई सुरक्षा परिषद की बैठक में 2 मार्च को रात 12 बजे से लेकर 5 मार्च को शाम 7 बजे तक भारत और चीन से जुडी सभी सीमाओं को सील करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में प्रधानमंत्री कार्की के अलावा गृहमंत्री सहित सभी सुरक्षा बल के प्रमुखों की उपस्थिति रही। यह कदम अवांछित गतिविधियों, अवैध आवागमन, धन तथा आपत्तिजनक सामग्रियों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।

गृहमंत्री ओमप्रकाश अर्याल ने बुधवार को बताया कि सीमा सील रहने की अवधि में आम नागरिकों की आवाजाही, छोटे व्यापारिक आवागमन तथा निजी वाहनों का प्रवेश-निकास प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, अत्यावश्यक सेवाओं जैसे एंबुलेंस, कूटनीतिक मिशन, और विशेष अनुमति प्राप्त आपातकालीन मामलों में आवश्यक समन्वय के बाद अनुमति दी जा सकती है।

निर्वाचन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सीमा क्षेत्रों में अतिरिक्त रूप से तैनात किया गया है। सुरक्षा निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष चेकिंग अभियान भी चलाया जाएगा।

निर्वाचन आयोग नेपाल ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय चुनाव की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। आयोग के अनुसार खुली सीमा के कारण चुनाव के दौरान बाहरी प्रभाव की आशंका को ध्यान में रखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।

नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा व्यवस्था लंबे समय से प्रचलित है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों का आवागमन सहज रहता है। चुनाव जैसे संवेदनशील समय में अस्थायी प्रतिबंध को सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सीमा बंदी की अवधि का सम्मान करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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