नेपाल में पदमुक्त किए गए 1,594 से अधिक सरकारी पदों में से अब तक 200 पदों पर हुई नियुक्ति

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नेपाल में पदमुक्त किए गए 1,594 से अधिक सरकारी पदों में से अब तक 200 पदों पर हुई नियुक्ति


काठमांडू, 25 अगस्त (हि.स.)। नेपाल में बालेन्द्र शाह सरकार का गठन होने के बाद सार्वजनिक अधिकारियों की पदमुक्ति संबंधी विशेष व्यवस्था अध्यादेश लाकर रिक्त किए गए 1,594 पदों में से अब तक केवल 200 के करीब पदों पर ही पूर्ति हो सकी है।

इसी साल मार्च में बालेन्द्र शाह की सरकार बनने के बाद अप्रैल में विभिन्न बोर्डों, समितियों और संस्थानों के 1,594 पदाधिकारियों को पदमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद से विभिन्न निकायों के कार्य प्रभावित हुए हैं। कई आयोगों के काम पूरी तरह ठप्प पड़े हैं और रजिस्ट्रार का पद रिक्त रहने से संस्थाएं बजट, नीति और कार्यक्रमों के बिना काम करने को मजबूर हैं।

संविधान और प्रचलित अन्य कानूनों के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार कई नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। दलीय हस्तक्षेप से मुक्त कराने का हवाला देकर राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द करने के लिए अध्यादेश लाया गया था, लेकिन सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पर अपने कार्यकर्ताओं को भर्ती करने का आरोप लग रहा है।

प्रक्रिया और पद्धति का पालन न होने का हवाला देते हुए अदालत ने कई सरकारी नियुक्तियों को रद्द भी कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने अभी पिछले सप्ताह ही नेपाल वायुसेवा निगम के कार्यकारी अध्यक्ष महेश्वर भक्त श्रेष्ठ की नियुक्ति को रद्द कर दिया। अदालत का मानना है कि अधिक उम्र के व्यक्ति को नियुक्त करने का निर्णय प्रथम दृष्टया ही खारिज किए जाने योग्य है। बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से की गई नियुक्ति अदालत से खारिज होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले नेपाल वायुसेवा निगम के संचालक समिति सदस्य के रूप में नियुक्त डॉ. दीपक प्रसाद बास्तोला की नियुक्ति को भी सर्वोच्च अदालत ने रद्द कर दिया था।

योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया न मिलने का हवाला देते हुए अदालत ने बीते जून को डॉ. बास्तोला को निगम की संचालक समिति में नियुक्त करने के निर्णय को खारिज कर दिया था। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने बीते बास्तोला सहित पांच लोगों को संचालक समिति में नियुक्त किया था। चयन समिति की योग्यता सूची (मेरिट लिस्ट) के अनुसार पहले नंबर पर अनुशंसित होने के बावजूद सरकार पर इसके विपरीत निर्णय लेने का आरोप लगाते हुए उपेन्द्र बहादुर कार्की ने अदालत में रिट याचिका दायर की थी। अदालत ने टिप्पणी की कि मंत्री ने बिना किसी आधार के 'पिक एंड चूज' (मनमानी पसंद) किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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