नेपाल ने एडीबी से 25 अरब रुपये के रियायती ऋण का किया समझौता, पेयजल और सीमा शुल्क आधुनिकीकरण पर होगा निवेश

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नेपाल ने एडीबी से 25 अरब रुपये के रियायती ऋण का किया समझौता, पेयजल और सीमा शुल्क आधुनिकीकरण पर होगा निवेश


नेपाल ने एडीबी से 25 अरब रुपये के रियायती ऋण का किया समझौता, पेयजल और सीमा शुल्क आधुनिकीकरण पर होगा निवेश


काठमांडू, 06 जुलाई (हि.स.)। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष मासातो कांडा की नेपाल यात्रा के दौरान नेपाल ने एडीबी के साथ 16.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 25 अरब नेपाली रुपये) के रियायती ऋण का समझौता किया है।

सोमवार को वित्त मंत्री डॉ स्वर्णिम वाग्ले और एडीबी अध्यक्ष कांडा की उपस्थिति में दो विकास परियोजनाओं में निवेश के लिए इस ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते पर वित्त सचिव डॉ घनश्याम उपाध्याय और नेपाल में एडीबी के देशीय निदेशक आनो कुश्वा ने हस्ताक्षर किए।

नेपाल इस ऋण का उपयोग एकीकृत पेयजल एवं सीवरेज प्रबंधन परियोजना तथा दक्षिण एशिया उपक्षेत्रीय आर्थिक सहयोग (सासेक) आपूर्ति प्रबंधन सुधार कार्यक्रम (सब-प्रोग्राम–2) के लिए करेगा।

वित्त मंत्रालय के सहसचिव एवं प्रवक्ता अमृत लम्साल के अनुसार, 11.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर पेयजल एवं सीवरेज प्रबंधन परियोजना के लिए तथा 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर आपूर्ति प्रबंधन सुधार परियोजना के लिए लिए गए हैं।

इस राशि का उपयोग स्थानीय स्तर पर पेयजल और सीवरेज की एकीकृत अवसंरचना विकसित करने के साथ-साथ सीमा शुल्क (कस्टम) प्रक्रियाओं और लॉजिस्टिक सेवाओं के आधुनिकीकरण में किया जाएगा।

कार्यक्रम में वित्त मंत्री डॉ वाग्ले ने नेपाल के विकास में एडीबी के सहयोग की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले समय में दोनों पक्षों की साझेदारी और मजबूत होगी।

एडीबी अध्यक्ष मासातो कांडा ने नेपाल के साथ छह दशक पुराने सहयोग को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नेपाल की आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपटने में एडीबी हमेशा सहयोगी रहेगा तथा बैंक की प्राथमिकताएं नेपाल की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं। कार्यक्रम में नेपाल सरकार और एडीबी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

एडीबी की वित्तीय सहायता से नेपाल सरकार 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का ऋण लेकर सीमा शुल्क प्रशासन का आधुनिकीकरण, व्यापार संवर्धन और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी।

इस परियोजना के तहत कस्टम प्रणाली को तकनीक आधारित बनाया जाएगा। जोखिम-आधारित जांच और सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से सीमा शुल्क व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

एडीबी के अनुसार, बेहतर अवसंरचना, मजबूत नियामकीय ढांचे और समन्वित व्यवस्था के जरिए आपूर्ति प्रबंधन प्रणाली को भी सशक्त बनाया जाएगा। इससे व्यापार लागत कम होगी, सीमापार व्यापार अधिक सुगम और पूर्वानुमेय बनेगा तथा आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की क्षमता में वृद्धि होगी।

परियोजना का उद्देश्य वस्तुओं के कुशल परिवहन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखला (रीजनल वैल्यू चेन) को मजबूत करना भी है।

दूसरी ओर, पेयजल एवं सीवरेज प्रबंधन परियोजना छोटे और मध्यम शहरों की पेयजल अवसंरचना पर केंद्रित है। एडीबी का अनुमान है कि इस परियोजना से 13 जिलों के लगभग 8.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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