लारीजानी की हत्या का बदला लेने की चेतावनी, ईरान ने खाड़ी के ऊर्जा ठिकानों की ‘टारगेट लिस्ट’ जारी की

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तेहरान, 18 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी की हत्या के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए बदले की चेतावनी दी है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि लारीजानी की हत्या के जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी होगी।

सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार के दिन जारी अपने लिखित संदेश में खामेनेई ने कहा कि अली लारीजानी की हत्या यह साबित करती है कि दुश्मनों के लिए वह कितने महत्वपूर्ण थे। उन्होंने लारीजानी को एक “बुद्धिमान और समर्पित नेता” बताते हुए कहा कि उनके खून का हिसाब लिया जाएगा।

खामेनेई ने अपने संदेश में कहा कि हर शहीद के खून की कीमत होती है और इस अपराध के जिम्मेदार लोगों को जल्द इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमले ईरान को कमजोर नहीं करेंगे बल्कि देश को और अधिक मजबूत बनाएंगे।

इसी बीच ईरानी मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में संभावित हमलों के लिए ऊर्जा प्रतिष्ठानों की एक “टारगेट लिस्ट” जारी की है। रिपोर्टों के मुताबिक इस सूची में सऊदी अरब, यूएई और कतर के प्रमुख तेल और गैस प्रतिष्ठान शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि संभावित निशानों में सऊदी अरब की सैमरेफ रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई का अल होसन गैस फील्ड तथा कतर की रस लाफान रिफाइनरी और मेसईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स जैसे बड़े ऊर्जा केंद्र शामिल हो सकते हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य में इन ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

ईरान का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब उसने अपने प्रमुख ऊर्जा क्षेत्र साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमलों को “युद्ध अपराध” बताया है और इसके लिए जवाबी कार्रवाई की बात कही है।

उधर ईरान की ओर से संभावित हमलों की चेतावनी के बाद सऊदी अरब ने भी सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया है। सऊदी की राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने राजधानी रियाद और अल-खर्ज क्षेत्र में संभावित खतरे को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। हालांकि खतरे की प्रकृति को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

उल्लेनीय है कि हाल के हमलों और जवाबी चेतावनियों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाता है तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक तेल और गैस बाजार पर भी पड़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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