इराक ने अमेरिका-इजराइल विरोधी खजाली को उप प्रधानमंत्री बनाया

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इराक ने अमेरिका-इजराइल विरोधी खजाली को उप प्रधानमंत्री बनाया


इराक ने अमेरिका-इजराइल विरोधी खजाली को उप प्रधानमंत्री बनाया


बगदाद (इराक), 16 अक्टूबर (हि.स.)। इराक की संसद ने ईरान समर्थित 'असाएब अहल अल-हक' समूह के सदस्य लैथ अल-खजाली उप प्रधानमंत्री बनाए जाने को मंजूरी दे दी । लैथ अल-खजाली को अमेरिका और इजराइल का कट्टर विरोधी माना जाता है। अमेरिका इस समूह को आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। इसी के साथ प्रधानमंत्री अली अल-जैदी की सरकार का गठन पूरा हो गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब इराक, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध के नतीजों से जूझ रहा है। सांसदों ने गुरुवार को तीन उप प्रधानमंत्रियों और 11 मंत्रियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इनमें रक्षामंत्री के रूप में नायेफ अल-शम्मरी और गृहमंत्री के रूप में यासिर अल-मलिकी शामिल हैं।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, लैथ अल-खजाली इस समूह के नेता कैस अल-खजाली के भाई हैं। अमेरिका ने 2020 में असाएब अहल अल-हक को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। साथ ही, अमेरिका ने इन दोनों भाइयों को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी करार दिया था। अमेरिका ने इसके पीछे हमलों का हवाला दिया, जिनमें 2007 का एक हमला भी शामिल है, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। प्रधानमंत्री अल-जैदी ने कहा कि उनकी सरकार को युद्ध के कारण पैदा हुई गंभीर आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। युद्ध से पहले इराक होर्मुज जलडमरू मध्य के रास्ते रोजाना लगभग 35 लाख (3.5 मिलियन) बैरल तेल का निर्यात करता था। इससे सरकार को 90 प्रतिशत राजस्व प्राप्त होता था। उन्होंने गैर सरकारी सशस्त्र समूहों से हथियार वापस लेने और अमेरिकी सेना की पूरी तरह से वापसी सुनिश्चित करने का भी वादा किया है।

असाएब अहल अल-हक को अरबी में लीग ऑफ द राइटियस (सच्चे लोगों का संघ) कहा जाता है। यह इराक का प्रमुख शिया इस्लामी राजनीतिक दल और अर्धसैनिक संगठन है। इसे 'खजाली नेटवर्क' के नाम से भी जाना जाता है और यह इराक की राजनीति व सुरक्षा व्यवस्था में बहुत गहरा प्रभाव रखता है। इसकी स्थापना वर्ष 2006 में कैस अल-खजाली ने की थी। शुरुआत में यह संगठन इराक के एक अन्य शक्तिशाली नेता मुक्तदा अल-सद्र के 'महदी आर्मी' संगठन का हिस्सा था। बाद में वैचारिक मतभेदों के कारण यह उससे अलग होकर एक स्वतंत्र संगठन बना। यह संगठन शिया इस्लामवाद और अमेरिका और इजराइल विरोधी विचारधारा पर चलता है। इसे ईरान की कुद्स फोर्स और लेबनान के हिजबुल्लाह से वित्तीय और सैन्य मदद मिलती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

Livevns.news Desk
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