होर्मुज में पश्चिमी सैन्य मौजूदगी पर ईरान की चेतावनी, ‘कड़ा जवाब’ देने की बात कही
तेहरान, 10 मई (हि.स.)। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फ्रांस और ब्रिटेन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप का सख्त जवाब दिया जाएगा। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि यदि फ्रांस, ब्रिटेन या किसी अन्य देश के युद्धपोत अमेरिका की “गैरकानूनी कार्रवाइयों” में सहयोग करते हैं, तो तेहरान तत्काल और निर्णायक प्रतिक्रिया देगा।
ईरानी अधिकारियों का यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक केंद्र बना हुआ है। पिछले सप्ताह फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि उसका परमाणु ऊर्जा से संचालित विमानवाहक पोत “चार्ल्स डी गॉल” क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। फ्रांस और ब्रिटेन का कहना है कि उनका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस संयुक्त मिशन का समर्थन कर रहे हैं। दोनों देशों ने इसे “रक्षात्मक अभियान” बताया है और कहा है कि इसका मकसद क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखना है।
दूसरी ओर, ईरान का आरोप है कि पश्चिमी देशों की सैन्य तैनाती से हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि होर्मुज क्षेत्र की सुरक्षा क्षेत्रीय देशों की जिम्मेदारी है और बाहरी शक्तियों की मौजूदगी से संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं भी तेज हुई हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

