होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव, ईरान ने मांगी संप्रभुता
तेहरान/वॉशिंगटन, 11 मई (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के समक्ष दिए गए अपने नए प्रस्ताव में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता की मांग उठाई है। ईरान ने इस जलमार्ग पर अधिक नियंत्रण की इच्छा जताई है, जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इसी रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत और खाड़ी क्षेत्र के अन्य तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचता है। फरवरी में अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष बढ़ने के बाद से ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दोनों देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) इसके कुछ हिस्सों में आते हैं। संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून के अनुसार किसी भी देश को अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की खोज, संरक्षण और प्रबंधन का अधिकार होता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून यह भी स्पष्ट करता है कि अन्य देशों के जहाजों को शांतिपूर्ण आवागमन का अधिकार प्राप्त है।
संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत किसी तटीय देश को विदेशी जहाजों के “निर्दोष मार्ग” में बाधा नहीं डालनी चाहिए, जब तक कि सुरक्षा से जुड़ी कोई विशेष परिस्थिति न हो। ऐसे में ईरान की मांग और जलमार्ग पर बढ़ते नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और कूटनीतिक बहस तेज हो सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

