ईरान-अमेरिका में संभावित समझौते काे लेकर इजराइल के पूर्व पीएम ने नेतन्याहू काे घेरा

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ईरान-अमेरिका में संभावित समझौते काे लेकर इजराइल के पूर्व पीएम ने नेतन्याहू काे घेरा


तेल अवीव, 14 जून (हि.स.)। इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता यायर लापिड ने ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यदि ऐसा समझौता होता है तो इजराइल घोषित युद्ध लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहेगा।

ईरानी सरकारी समाचार संगठन प्रेस टीवी के अनुसार, शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी बयान में इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि संभावित समझौते के बाद भी ईरान की मौजूदा सरकार सत्ता में बनी रहेगी और उसका मिसाइल कार्यक्रम जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नेतन्याहू सरकार अपने घोषित रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में असफल रही है।

यायर लापिड की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौता ज्ञापन पर चर्चा की खबरें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि ऐसा समझौता दोनों देशों के बीच आगे की वार्ताओं का आधार बन सकता है।

8 अप्रैल को भी जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की निर्णायक और सफल जवाबी कार्रवाई के बीच एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की थी, लापिड ने इस युद्धविराम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे नेतन्याहू के लिए राजनीतिक आपदा करार दिया था। उन्होंने कहा था कि तेल अवीव उस समय बातचीत की मेज पर भी मौजूद नहीं था जब हमारी सुरक्षा के मूल मुद्दों पर फैसले लिए जा रहे थे।

लापिड ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि नेतन्याहू राजनीतिक और रणनीतिक रूप से उन लक्ष्यों में से एक भी हासिल करने में नाकाम रहे जो उन्होंने खुद तय किए थे। जैसा कि इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ पिछली थोपी गई आक्रामकता के दौरान हुआ था, दूसरे थोपे गए युद्ध में भी ईरानी सशस्त्र बलों ने पूरे क्षेत्र में संवेदनशील और रणनीतिक अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमले किए।

हालिया संघर्ष के दौरान ईरान और इज़राइल के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के आरोप लगाए। क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसके प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई थी।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच कोई नया समझौता होता है, तो उसका असर न केवल मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर पड़ेगा बल्कि इज़राइल की घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है।

विपक्षी नेता लापिड के बयान ने एक बार फिर इज़राइल के भीतर सुरक्षा नीति और ईरान को लेकर सरकार की रणनीति पर बहस को तेज कर दी है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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