नेपाल-भारत अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन 27 से 29 मार्च तक काठमांडू में

काठमांडू, 20 मार्च (हि.स.)। नेपाल की राजधानी काठमांडू में तीन दिवसीय नेपाल-भारत अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का आगाज 27 मार्च को होगा। इसमें दोनों देशों के चार दर्जन से अधिक विद्वानों के हिस्सा लेने की संभावना है। नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान नेपाल के इस आयोजन में भारत के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और इंडिया फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है।

सम्मेलन के संयोजक डॉ. प्रेमराज न्यौपाने ने यह जानकारी पत्रकार सम्मेलन में दी। न्यौपाने ने बताया कि इस सम्मेलन में भारत के कई विश्वविद्यालयों के उपकुलपति हिस्सा लेंगे। नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के सह प्राध्यापक रहे डॉ. न्यौपाने ने कहा कि नेपाल से करीब तीन दर्जन और भारत से 40 से अधिक विशेषज्ञों की उपस्थिति रहेगी। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी अपनी और पहली भाषा है। इसको लेकर जितना कार्य किया जाना चाहिए वह अब तक नहीं हुआ है। संस्कत को जन-जन की भाषा बनाने की जरूरत है।

नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. दीपक अधिकारी ने कहा कि इस कार्यक्रम को हमने एक अभियान के रूप में लिया है। संस्कृत भाषा को प्राथमिक स्तर से विश्वविद्यालय स्तर तक कैसे जोड़ा जाए, इसको लेकर जनजागरण बहुत ही आवश्यक है। डा अधिकारी ने कहा कि सिर्फ सरकार पर निर्भर रह कर संस्कृत का विकास और विस्तार संभव नहीं है।

काठमांडू के पार्क विलेज रिसोर्ट में होने वाले इस सम्मेलन में नेपाल के संस्कृत विश्वविद्यालय, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू विश्वविद्यालय, पूर्वांचल विश्वविद्यालय तथा पोखरा विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों की सहभागिता रहेगी। भारत के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कई अन्य विश्वविद्यालयों के उपकुलपति तथा भाषा विशेषज्ञों की उपस्थिति रहने वाली है।

हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज दास/मुकुंद

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