नेपाल : सत्तारूढ़ गठबन्धन में असंतोष, शीर्ष नेताओं के बीच बढ़ी दूरी



काठमांडू, 3 मई (हि.स.)। नेपाल में वाम दलों के बीच बने नए सत्तारूढ़ गठबन्धन में एक महीने बाद ही खटपट होने की जो सूचनाएं पहले सियासी गलियारे में तैर रही थीं, उनका असर अब सार्वजनिक मंचों पर भी दिखने लगा है। सत्ता घटक दल के शीर्ष नेताओं के बीच अविश्वास का वातावरण बनने से उनके बीच दूरी बढ़ती जा रही है।

मार्च 2024 के पहले हफ्ते में नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ कर वाम दलों का गठबन्धन बनाने वाले प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड दो महीने के बाद ही अपने फैसले पर पछताने लगे हैं। माओवादी नेताओं के शीर्ष नेताओं से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने बताया है कि ठीक से काम करने के लिए केपी शर्मा ओली के साथ गठबन्धन किया था लेकिन यहां कांग्रेस से भी अधिक समस्या है। माओवादी पार्टी के एक नेता ने बताया कि प्रचण्ड फिर से नेपाली कांग्रेस के साथ गठबन्धन करने की बात करने लगे हैं। वैसे प्रचण्ड ने नया गठबन्धन बनने के एक महीने के बाद ही एक सार्वजनिक मंच से कहा था कि अगर उन्हें ठीक से काम नहीं करने दिया गया तो वो फिर से देश की राजनीति में उथलपुथल मचा सकते हैं।

प्रचण्ड द्वारा पुराने गठबन्धन को तोड़कर नया गठबन्धन बनाने से अब तक कई प्रदेश सरकारें अपना बहुमत साबित नहीं कर पाई है। दो प्रदेश सरकारों का मामला तो सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित है। इसी बीच अब प्रचण्ड सरकार के अहम घटक दल एकीकृत समाजवादी के अध्यक्ष माधव नेपाल ने गठबन्धन छोड़ने की धमकी दी है। पिछले दो तीन दिनों में आयोजित हर एक कार्यक्रम में माधव नेपाल ने इस गबन्धन का कोई भविष्य नहीं होने की बात कहते हुए किसी भी समय गठबन्धन से बाहर निकलने की चेतावनी देते नजर आए हैं। माधव नेपाल ने एमाले पार्टी और उसके अध्यक्ष ओली पर मनमानी करने, गठबन्धन धर्म का पालन नहीं करने और पूर्व में हुई सहमति से पीछे हटने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ओली अपनी मनमानी चला रहे हैं, गठबन्धन के प्रति वो ईमानदार नहीं हैं।

उधर, केपी ओली ने भी अपने सांसदों को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है। गठबन्धन दलों के बीच एक दूसरे के विरोध में खुले रूप से हो रही बयानबाजी के बीच ओली ने गुरुवार को प्रचण्ड से दो घंटे तक बातचीत की है। माना जा रहा है कि दोनों के बीच गठबंधन में बढ़ रहे आपसी विवाद पर गम्भीरता से बातचीत हुई है। प्रचण्ड से मुलाकात के बाद ओली ने अपनी पार्टी की तरफ से सरकार में शामिल सभी मंत्रियों को बुला कर किसी समय भी राजनीतिक परिस्थिति बदलने का संकेत देते हुए उसका सामना करने के लिए तैयार रहने काे कहा है। एमाले की तरफ से सरकार में उद्योग मंत्री रहे दामोदर भण्डारी ने बताया कि उनके पार्टी अध्यक्ष ने गठबन्धन में कुछ अविश्वास का संकेत तो दिया है लेकिन उन्हें नहीं लगता है कि तत्काल इसका गठबन्धन पर कोई असर पड़ने वाला है।

सरकार में उपप्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री रवि लामिछाने ने भी गठबन्धन छोड़ने की बात कही है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए लामिछाने ने कहा कि अगर उन्हें ठीक से काम नहीं करने दिया गया तो वो कभी भी सरकार छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार में शामिल बड़े दल उनके और उनकी पार्टी के मंत्रालयों के काम में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। लामिछाने ने कहा कि उनके खिलाफ अनर्गल प्रचार कर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। अगर यही सब चलता रहा तो वो किसी भी समय स्ट्रॉंग पॉलिटिकल स्टेप उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज दास/दधिबल

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