होर्मुज संकट गहराया, आईईए ने बताया अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट

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पेरिस/नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के चलते वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फतिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि स्थिर अर्थव्यवस्थाओं के लिए दुनिया अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बन सकती है।

एक इंटरव्यू में बिरोल ने कहा कि यह संकट 1973, 1979 और 2022 के ऊर्जा संकटों से भी ज्यादा गंभीर है। उनका मानना है कि होर्मुज जलजमरूमध्य में बाधा आने से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रास्तों में से एक है।

इस संकट का सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ेगा। तेल और गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी होने से इन देशों में महंगाई बढ़ेगी और खाद्य पदार्थों के दाम भी ऊपर जा सकते हैं। इससे आम लोगों की जीवन-यापन लागत पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

वहीं, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों को भी इस संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति में कमी से औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान को दी गई चेतावनियों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। मंगलवार को तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो वैश्विक बाजारों में चिंता का विषय बन गया है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती, तो यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और महंगाई—तीनों पर इसका असर साफ नजर आ सकता है। मौजूदा हालात न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता को बढ़ावा देने वाले साबित हो सकते हैं, जिस पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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