नेपाली पासपोर्ट प्रिंटिंग विवाद पर जर्मनी की कड़ी आपत्ति, भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया बेबुनियाद

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नेपाली पासपोर्ट प्रिंटिंग विवाद पर जर्मनी की कड़ी आपत्ति, भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया बेबुनियाद


नेपाली पासपोर्ट प्रिंटिंग विवाद पर जर्मनी की कड़ी आपत्ति, भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया बेबुनियाद


काठमांडू, 25 जून (हि.स.)। जर्मन की सरकार ने नेपाल के पासपोर्ट प्रिंटिंग ठेका प्राप्त दो जर्मन कंपनियों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के ‘अप्रमाणित’ आरोपों पर गंभीर आपत्ति जताई है।

जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जर्मनी में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत (चार्ज डी अफेयर्स) सागर प्रसाद फुयाल को तलब कर इस मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही, एक लिखित आपत्ति पत्र भी सौंपा गया।

नेपाल सरकार को प्राप्त विरोध पत्र में जर्मन सरकार ने सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी Veridos और निजी कंपनी Mühlbauer ID Services के खिलाफ नेपाल में दायर भ्रष्टाचार मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

जर्मन सरकार के पत्र में कहा गया है कि पासपोर्ट ठेका मामले में भ्रष्टाचार का केस तो दर्ज किया गया, लेकिन अदालत में दायर आरोपपत्र में भ्रष्टाचार का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

पत्र में कहा गया है कि संबंधित कंपनियों ने किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं किया है, इसलिए आरोपपत्र में किसी सबूत का उल्लेख नहीं है।

जर्मन सरकार ने यह भी कहा कि जर्मन कंपनियों के कर्मचारियों पर आरोप लगाने से उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जर्मन कंपनियों के साथ हुए अनुबंध रद्द किए गए, तो इससे जटिल कानूनी और वित्तीय जोखिम पैदा हो सकते हैं।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि अनुबंध रद्द किया जाता है, तो जर्मन कंपनियां अपनी प्रतिष्ठा एवं व्यावसायिक नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी दावा करने को मजबूर होंगी।

नेपाल के कार्यवाहक राजदूत को सौंपे गए लिखित विरोध पत्र में जर्मन विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि उसकी कंपनियों के कर्मचारी अगले सप्ताह नेपाल आकर ‘प्रोजेक्ट लाइव’ (नए पासपोर्ट की छपाई शुरू करने की प्रक्रिया) को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही, इन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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