बलूचिस्तान के ग्वादर में मिले पांच टॉर्चर्ड शव, मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप
क्वेटा, 06 जुलाई (हि.स.)। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले में पांच बलूच नागरिकों के यातनाओं के निशान वाले शव मिलने से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। मानवाधिकार संगठनों और मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि इनमें से कम से कम चार लोगों को कई महीने पहले जबरन गायब किया गया था और अब उनके शव बरामद हुए हैं।
हालांकि, पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि ये पांचों व्यक्ति हथियारबंद थे और शुक्रवार को जिवानी के पनवान क्षेत्र में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के शिविर पर हुए हमले के बाद चलाए गए अभियान में मारे गए। इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के मजीद ब्रिगेड ने ली थी।
दूसरी ओर, बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी), वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी), स्थानीय कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और मृतकों के परिजनों ने सेना के दावे को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मृतकों के जबरन लापता किए जाने के दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं और उनके परिवार लंबे समय से उनकी रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
मृतकों की पहचान अब्दुल हक, पीरी आसा, शाह बख्श, हैदर अली मोहम्मद और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के रूप में हुई है।
मानवाधिकार संगठन 'पांक' ने आरोप लगाया कि ग्वादर स्थित मेमार-ए-नौ अकादमी के प्राचार्य अब्दुल हक बलूच को महीनों पहले जबरन गायब किया गया था। बाद में उनका यातनाग्रस्त शव जिवानी क्षेत्र से बरामद हुआ। संगठन ने इसे न्यायेतर हत्या करार देते हुए इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की।
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने कहा कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि बलूचिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों के शव मिलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। संगठन के अनुसार, यह बलूच समुदाय के खिलाफ व्यवस्थित दमन और मानवाधिकार उल्लंघन का हिस्सा है।
बीवाईसी के अनुसार, 28 वर्षीय मछुआरे पीरी आसा को 6 जनवरी की रात उनके घर से सुरक्षा बल उठा ले गए थे। तब से उनका कोई पता नहीं चला और अब उनका शव यातनाओं के निशानों के साथ मिला है।
इसी तरह, 33 वर्षीय मछुआरे शाह बख्श उमर का शव भी लगभग छह महीने बाद बरामद हुआ। बीवाईसी का आरोप है कि सुरक्षा बल पहले लोगों को जबरन गायब करते हैं और बाद में उन्हें किसी सैन्य अभियान में मारा गया आतंकवादी बताकर पेश कर देते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

