डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने आर्कटिक में बढ़ाई सैन्य मौजूदगी, नाटो सहयोगियों के साथ अभ्यास शुरू

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कोपेनहेगन/नुक(ग्रीनलैंड), 14 जनवरी (हि.स.)। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य सक्रियता को और तेज कर दिया है। ग्रीनलैंड सरकार ने पुष्टि की है कि डेनिश सेना और नाटो के अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर ग्रीनलैंड के भीतर और आसपास सैन्य अभ्यास किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है।

ग्रीनलैंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया कि इन अभ्यासों का मकसद आर्कटिक की विशिष्ट और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सैन्य कौशल का विकास करना और क्षेत्र में ऐसी उपस्थिति सुनिश्चित करना है, जो यूरोप और अटलांटिक की समग्र सुरक्षा में योगदान दे।

इस सैन्य तैनाती को लेकर दिन में पहले ही अटकलें तेज हो गई थीं, जब डेनमार्क के मीडिया में खबरें सामने आईं कि ग्रीनलैंड में सैनिकों की आवाजाही बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, एक अग्रिम सैन्य कमान की तैनाती भी की गई है, जिसे व्यापक सैन्य उपस्थिति की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। यह पहल ऐसे समय पर की गई है, जब वाशिंगटन में अमेरिका के साथ अहम वार्ताएं होने वाली हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस और चीन से कथित खतरे को लेकर बयानबाजी तेज हुई है।

डेनमार्क, ग्रीनलैंड और यूरोपीय नाटो सहयोगी देशों का यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे आर्कटिक क्षेत्र में किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती का सामूहिक रूप से जवाब देने के लिए तैयार हैं। साथ ही, क्षेत्र में अपनी संप्रभुता तथा रणनीतिक हितों की रक्षा को लेकर गंभीर हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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