नेपाल: दो प्रांतीय सरकार में संवैधानिक संकट, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

काठमांडू, 09 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल में सत्ता गठबन्धन बदलने का असर प्रदेश सरकारों पर पड़ा है। नए गठबन्धन के मुताबिक सरकार फेरबदल के क्रम में दो प्रांतीय सरकारों का पेंच फंस गया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है।

नेपाल में बने वामपंथी गठबन्धन के मुताबिक सभी प्रांतीय सरकार बदल रही है। इसी क्रम में गण्डकी प्रदेश और कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। गण्डकी प्रदेश में एमाले के तरफ से सदन के स्पीकर के हस्ताक्षर सहित सरकार गठन का दावा किया गया है। एमाले प्रदेश संसदीय दल के नेता खगराज अधिकारी ने सरकार गठन के लिए आवश्यक बहुमत जुटाने के लिए प्रदेश सभा के स्पीकर सहित का हस्ताक्षर सहित राज्यपाल के पास सरकार गठन का दावा किया था, जिसके बाद राज्यपाल ने अधिकारी को मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्ति दे दी है।

गण्डकी में सरकार गठन संविधान के मर्म के विपरीत और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ होने की बात कहते हुए नेपाली कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। कांग्रेस संसदीय दल के नेता व निवर्तमान मुख्यमंत्री सुरेन्द्र राज पाण्डे ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए गण्डकी के नवनियुक्त मुख्यमंत्री को पद से बर्खास्त करने की मांग की है। अपने याचिका में पाण्डे ने सुप्रीम कोर्ट के कोशी पिरदेश सरकार गठन के समय स्पीकर के हस्ताक्षर को मान्यता देने से इंकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि सदन में वोट बराबरी के बाद ही स्पीकर अपना वोट डाल सकते हैं लेकिन सदन के स्पीकर का हस्ताक्षर बहुमत का दावा करते समय प्रयोग करना असंवैधानिक है। इस मामले में बुधवार को सुनवाई होना तय हुआ है। अगर कोर्ट अपने पुराने फैसले पर कायम रहा तो गण्डकी के मुख्यमंत्री खगराज अधिकारी का पद जाना तय है।

गण्डकी के अलावा कोशी प्रदेश में भी मुख्यमंत्री बदलने को लेकर संविधान की धाराओं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मामला अटका हुआ है। कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री केदार कार्की के खिलाफ बहुमत विधायकों ने राज्यपाल को अपना हस्ताक्षर सौंप दिया है लेकिन मुख्यमंत्री कार्की ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह सरकार संविधान की उस धारा के तहत हुई है जिसके बाद सरकार परिवर्तन नहीं हो सकता है और अगर सरकार बहुमत नहीं साबित कर पाती है तो मध्यावधि निर्वाचन में जाना ही एकमात्र विकल्प है। मुख्यमंत्री कार्की के द्वारा बहुमत खो देने के बावजूद पद नहीं छोडने और बहुमत साबित करने के लिए विशेष अधिवेशन बुलाने से भी इंकार करने के बाद नए सत्तारूढ़ दल कल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रही है। एमाले संसदीय दल के नेता हिक्मत कार्की ने कहा कि मुख्यमंत्री को पदमुक्त करने के लिए बुधवार को ही वो बहुमत विधायकों के हस्ताक्षर सहित का पत्र सहित सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/आकाश

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