चीन के 13 विमानों ने ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में किया प्रवेश

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चीन के 13 विमानों ने ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में किया प्रवेश


ताइपे/इस्तांबुल, 18 मार्च (हि.स.)। ताइवान ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसके आसपास कम से कम 36 चीनी सैन्य विमान, छह नौसैनिक जहाज़ और एक सरकारी जहाज़ सक्रिय थे, जिनमें से 13 विमानों ने ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश किया। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सशस्त्र बलों ने स्थिति पर कड़ी नजर रखी और आवश्यकतानुसार जवाबी कार्रवाई के लिए बल तैनात किए हैं। यह घटनाक्रम चीन और ताइवान के बीच बढ़ते राजनीतिक और सैन्य तनाव का नया संकेत है।

तुर्किये की सरकारी संवाद समिति अनाडाेलू एजेंसी (एए) के अनुसार ताइवान के आसपास तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसने कम से कम 36 चीनी सैन्य विमानों, छह नौसैनिक जहाज़ों और एक सरकारी जहाज़ की गतिविधियों का पता लगाया है। इनमें से 13 विमानों ने ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन में प्रवेश किया। मंत्रालय ने कहा कि सशस्त्र बलों ने स्थिति पर नजर रखी और आवश्यकतानुसार जवाबी कार्रवाई के लिए बल तैनात किए।

ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बुधवार सुबह 36 चीनी विमान, आठ नौसैनिक जहाज़ और एक सरकारी जहाज़ ताइवान के समुद्री क्षेत्र के आस-पास देखे गए। इनमें से 24 विमानों ने ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा को पार किया और उत्तरी, मध्य, दक्षिण-पश्चिमी तथा पूर्वी एडीआईजेड में प्रवेश किया। मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की सशस्त्र सेनाओं ने स्थिति पर नजर रखते हुए उचित कार्रवाई की। इससे पहले मंगलवार को 28 चीनी सैन्य विमानों की गतिविधियों का पता चला था, जिनमें से 21 ने मध्य रेखा को पार किया था।

रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, हमने स्थिति पर पूरी नजर रखी है और आवश्यकतानुसार जवाब दिया है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि चीन का 'लॉन्ग मार्च 2डी' कैरियर रॉकेट, जिसने गुरुवार को कई उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाया, एडीआईजेड के ऊपर से गुज़रा।

ताइवान पर चीन का दावा एक जटिल ऐतिहासिक और राजनीतिक मुद्दा है। बीजिंग ने कहा है कि ताइवान चीन का अविभाज्य हिस्सा है, जबकि ताइवान अपनी अलग पहचान, सरकार, सेना और अर्थव्यवस्था के साथ स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। ताइवान पर चीन का दावा 1683 में शुरू हुआ, जब मिंग वफादार कोक्सिंगा को हराने के बाद किंग राजवंश ने द्वीप पर कब्ज़ा किया। वर्ष 1895 में पहले चीन-जापान युद्ध के बाद ताइवान जापान की कॉलोनी बना, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे चीन के नियंत्रण में वापस सौंपा गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ताइवान के आसपास लगातार चीनी सैन्य गतिविधियों में वृद्धि से क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है। ताइवान की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बल सतर्क हैं और चीन की हरकतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब चीन और ताइवान के बीच राजनीतिक और सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। ताइवान की एडीआईजेड को चीन मान्यता नहीं देता और लगातार इस क्षेत्र में गतिविधियों को अतिक्रमण के रूप में देखता है। वहीं, ताइवान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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