बांग्लादेश : पूर्व राष्ट्रपति शहाबुद्दीन की मुश्किलें बढ़ीं, एनसीपी ने की तत्काल गिरफ्तारी की मांग

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बांग्लादेश : पूर्व राष्ट्रपति शहाबुद्दीन की मुश्किलें बढ़ीं, एनसीपी ने की तत्काल गिरफ्तारी की मांग


बांग्लादेश : पूर्व राष्ट्रपति शहाबुद्दीन की मुश्किलें बढ़ीं, एनसीपी ने की तत्काल गिरफ्तारी की मांग


ढाका, 25 जुलाई (हि.स.)। बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा देने के बाद देश की नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) ने उनकी तत्काल गिरफ़्तारी की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि शहाबुद्दीन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल में लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों पर चुप्पी साधकर तानाशाही व्यवस्था का समर्थन किया।

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रथम आलो के मुताबिक ढाका स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में एनसीपी के सदस्य सचिव अख्तर हुसैन ने कहा कि 2024 के जन-आंदोलन के शहीदों को न्याय दिलाने और भविष्य में तानाशाही की वापसी रोकने के लिए शहाबुद्दीन के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उन्हें प्राप्त संवैधानिक सुरक्षा समाप्त हो गई है और अब उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई संभव है।

अख्तर हुसैन ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की भी आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी पहले से जानती थी कि शहाबुद्दीन राष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं, लेकिन महाभियोग चलाने के बजाय उन्हें विभिन्न सरकारी और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल कर उनकी स्थिति मजबूत करने में मदद की।

वहीं, एनसीपी के वरिष्ठ संयुक्त संयोजक आरिफ़ुल इस्लाम अदीब ने आरोप लगाया कि बीएनपी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति पद पर अपना पसंदीदा उम्मीदवार बैठाना चाहती है और इसी रणनीति के तहत शहाबुद्दीन को हटाने की प्रक्रिया तेज़ की गई।

इस बीच, संविधान के तहत कार्यवाहक राष्ट्रपति का पदभार संभालने वाले स्पीकर हाफ़िज़ उद्दीन अहमद ने प्रेसवार्ता में बताया कि मोहम्मद शहाबुद्दीन ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण इस्तीफ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और किडनी संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। हाल ही में उन्हें ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी का भी पता चला, जिसके कारण उन्हें कभी-कभी बेहोशी के दौरे पड़ते हैं। इन परिस्थितियों में उनके लिए संवैधानिक दायित्व निभाना संभव नहीं रह गया था।

स्पीकर ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत राष्ट्रपति का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया है और अनुच्छेद 54 के अनुसार उन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का इस्तीफ़ा पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है और इसे लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

हाफ़िज़ उद्दीन अहमद ने शहाबुद्दीन के बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही उनका चुनाव अवामी लीग सरकार के दौरान हुआ था, लेकिन उन्होंने हमेशा जनता द्वारा चुनी गई सरकार के प्रति सम्मान और समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की।

मोहम्मद शहाबुद्दीन 24 अप्रैल, 2023 को अवामी लीग के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे। हालांकि, 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जन-आंदोलन के बाद उन्हें हटाने की मांग उठी थी, लेकिन वे पद पर बने रहे। उन्होंने अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो वर्ष पहले इस्तीफ़ा दिया, जो बीएनपी सरकार के गठन के लगभग पाँच महीने बाद आया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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