अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासियों को तीसरे देशों में वापस भेजने की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मंज़ूरी दी
वॉशिंगटन, 30 सितंबर (हि.स./रिया नाेवाेस्ती)। सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी अधिकारियों को प्रवासियों को तीसरे देशों में वापस भेजने (डिपॉर्टेशन) की प्रक्रिया फिर शुरू करने की अस्थायी मंज़ूरी दे दी है।
रिया नाेवाेस्ती के अनुसार, पिछले हफ़्ते अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा था कि मैसाचुसेट्स के एक फ़ेडरल जज द्वारा अधिकारियों को अवैध प्रवासियों को उनके मूल देशों के अलावा अन्य देशों में भेजने से अस्थायी रूप से रोके जाने के बाद, न्याय विभाग सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा।
फ़ैसले में कहा गया, जस्टिस जैक्सन के सामने पेश की गई और उनके द्वारा कोर्ट को भेजी गई स्टे (रोक) की अर्ज़ी मंज़ूर की जाती है। मैसाचुसेट्स ज़िले के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के 25 फ़रवरी, 2026 के आदेश और फ़ैसले पर रोक लगाई जाती है।
इस तरह, कोर्ट ने मैसाचुसेट्स फ़ेडरल कोर्ट के फ़ैसले से पहले लगाई गई पाबंदियों को अस्थायी रूप से हटा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी घोषणा की कि वह दिसंबर में ट्रंप प्रशासन की उस नीति की वैधता पर बहस का सत्र आयोजित करेगा, जिसमें प्रवासियों को तीसरे देशों में तेज़ी से वापस भेजने का प्रावधान है।
साथ ही, दस्तावेज़ से पता चलता है कि तीन लिबरल जस्टिस - सोनिया सोटोमायोर, एलेना कगन और केतांज़ी जैक्सन - ने कोर्ट के फ़ैसले का विरोध किया।
47वें राष्ट्रपति के तौर पर अपने शपथ ग्रहण के दिन डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध आप्रवासन को रोकने और बड़े पैमाने पर लोगों को वापस भेजने (डिपॉर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू करने का संकल्प लिया था। उन्होंने अमेरिकी सीमा संकट से निपटने के लिए देशव्यापी आपातकाल की घोषणा भी की थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

