अमेरिकी अंतरिक्ष बल ने अंतरिक्ष-आधारित लक्ष्य ट्रैकिंग कार्यक्रम के लिए मांगे 1.06 अरब डॉलर

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अमेरिकी अंतरिक्ष बल ने अंतरिक्ष-आधारित लक्ष्य ट्रैकिंग कार्यक्रम के लिए मांगे 1.06 अरब डॉलर


मास्को, 15 जून (हि.स./रिया नोवोस्ती)। अमेरिकी अंतरिक्ष बल ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने अंतरिक्ष-आधारित मूविंग टारगेट इंडिकेटर (एएमटीआई) कार्यक्रम के विस्तार के लिए कुल 1.06 अरब डॉलर के बजट का अनुरोध किया है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष से जमीन, समुद्र और हवा में गतिशील लक्ष्यों की निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता को मजबूत करना है।

विश्लेषण के अनुसार बजट प्रस्ताव में 253.4 मिलियन डॉलर विवेकाधीन आधार निधि के रूप में ग्राउंड मूविंग टारगेट इंडिकेटर परियोजना के लिए आवंटित किए गए हैं। यह परियोजना अगली पीढ़ी के रडार उपग्रह विकसित करने पर केंद्रित है, जो दिन-रात और सभी मौसम परिस्थितियों में जमीन तथा समुद्री लक्ष्यों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उनकी स्पष्ट छवियां उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे।

अमेरिकी अंतरिक्ष बल के अनुसार यह प्रणाली अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और चुनौतीपूर्ण सैन्य वातावरण में लक्ष्य पहचान, निगरानी और लंबी दूरी के हमलों के लिए आवश्यक सेंसर-टू-शूटर प्रतिक्रिया समय को कम करने में मदद करेगी। इस परियोजना को अगस्त 2024 में विकास और निर्माण चरण में प्रवेश की मंजूरी मिली थी और इसका विकास कार्य 2025 से 2031 तक जारी रहेगा।

बजट का दूसरा और बड़ा हिस्सा 803 मिलियन डॉलर अंतरिक्ष-आधारित एयर मूविंग टारगेट इंडिकेटर (एएमटीआई) कार्यक्रम के लिए निर्धारित किया गया है। यह राशि अमेरिका की प्रस्तावित मिसाइल रक्षा पहल गोल्डन डोम फॉर अमेरिकाके तहत उपलब्ध कराई जाएगी।

यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर हवाई लक्ष्यों और संभावित खतरों की निगरानी के लिए उन्नत रडार तकनीक विकसित करने पर केंद्रित है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, लगभग 663 मिलियन डॉलर उच्च-बैंड रडार प्रणालियों के विस्तार पर खर्च किए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर बेहतर निगरानी क्षमता प्राप्त होगी।

इसके अतिरिक्त, 140 मिलियन डॉलर वैकल्पिक लो-बैंड रडार तकनीकों के विकास, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और अतिरिक्त रक्षा ठेकेदारों को शामिल करने के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन प्रणालियों का उद्देश्य व्यापक क्षेत्र में खोज और निगरानी क्षमता को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश अमेरिकी सेना को अंतरिक्ष-आधारित निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने, लंबी दूरी की सैन्य कार्रवाइयों की सटीकता बढ़ाने और संभावित हवाई एवं जमीनी खतरों की पहचान में महत्वपूर्ण बढ़त प्रदान कर सकता है। यह पहल अमेरिका की उभरती मिसाइल रक्षा रणनीति और वैश्विक सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पवन कुमार

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