अमिताभ बच्चन की तरह सांसद और अभिनेता रवि किशन को भी मिला पर्सनैलिटी राइट्स

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नई दिल्ली। भोजपुरी और हिंदी फिल्म अभिनेता तथा गोरखपुर से सांसद रवि किशन को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनके पक्ष में अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, फोटो, आवाज, व्यक्तित्व और सार्वजनिक पहचान का किसी भी व्यावसायिक या अन्य उद्देश्य से इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एआई, जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग और डीपफेक जैसी तकनीकों के जरिए भी उनकी पहचान का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा।

अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर की तरह मिली कानूनी सुरक्षा
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल पीठ ने रवि किशन के पक्ष में एक्स-पार्टी एड-इंटरिम इंजंक्शन जारी किया। इसके साथ ही रवि किशन उन चर्चित हस्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्हें अपनी सार्वजनिक पहचान की सुरक्षा के लिए अदालत से पर्सनैलिटी राइट्स का संरक्षण मिला है। इससे पहले अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और करण जौहर को भी ऐसी राहत मिल चुकी है।

अदालत में क्या कहा था रवि किशन ने
रवि किशन ने अदालत में दायर याचिका में बताया था कि पिछले कुछ समय से उनके नाम और छवि का दुरुपयोग कर अश्लील वेबपेज, फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट, अभद्र रील, एआई जनित वीडियो, डीपफेक सामग्री और अन्य आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि इससे उनकी प्रतिष्ठा, निजता और सार्वजनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

कोर्ट ने माना, प्रतिष्ठा को हो सकता है अपूरणीय नुकसान
वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और संजय उपाध्याय की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि रवि किशन का पक्ष मजबूत है। अदालत ने कहा कि यदि तत्काल राहत नहीं दी गई तो उनकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हो सकती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सेलिब्रिटी की पहचान और व्यक्तित्व का अनधिकृत इस्तेमाल उसके निजता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।

तीन दिन में हटानी होगी आपत्तिजनक सामग्री
अदालत ने प्रतिवादियों को तीन दिनों के भीतर सभी आपत्तिजनक यूआरएल और सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो सूचना मिलने के 72 घंटे के भीतर संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म और डोमेन रजिस्ट्रार को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स
पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति के नाम, तस्वीर, आवाज, हस्ताक्षर, बोलने की शैली, कैचफ्रेज और सार्वजनिक पहचान को बिना अनुमति इस्तेमाल होने से बचाते हैं। भारत में इसके लिए अलग कानून नहीं है, लेकिन अदालतें इन्हें निजता, प्रचार अधिकार और मानहानि से जुड़े कानूनी सिद्धांतों के तहत संरक्षण देती हैं। कॉपीराइट एक्ट, 1957 और ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 जैसे कानून भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रवि किशन बोले- यह सिर्फ मेरी नहीं, सभी की जीत
अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रवि किशन ने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि हर कलाकार, जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की गरिमा और पहचान की रक्षा का महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में एआई और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है और यह फैसला भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और जिम्मेदारी को मजबूत करेगा।

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