नवाब के कब्जे में थी महादेव की भूमि, काशी नरेश ने लड़ी कानूनी लड़ाई, फिर महादेव से कहा- अब हारा तो आपकी हार; चौथी बार मिली जीत
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम से करीब 300 मीटर दूर गोदौलिया क्षेत्र में विराजमान गौतमेश्वर महादेव का मंदिर केवल अपनी पौराणिक महत्ता के लिए ही नहीं, बल्कि काशी नरेश की आस्था से जुड़ी एक रोचक लोककथा के कारण भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि करीब दो सौ वर्ष पहले मंदिर की भूमि को लेकर हुए मुकदमे में काशी नरेश तीन बार हार गए थे। इसके बाद उन्होंने गौतमेश्वर महादेव के सामने संकल्प लिया और अंततः मंदिर की भूमि उनके अधिकार में आई।
गोदावरी कुंड के तट पर था महर्षि गौतम का आश्रम
गौतमेश्वर महादेव का उल्लेख स्कंदपुराण के काशी खंड में मिलने की मान्यता है। मंदिर के प्रधान पुजारी पं. रामदयाल पाठक के अनुसार प्राचीन काल में वर्तमान गोदौलिया क्षेत्र में गोदावरी कुंड हुआ करता था। इसी कुंड के किनारे महर्षि गौतम का आश्रम था और यहीं गौतमेश्वर महादेव विराजमान थे।
धार्मिक मान्यता है कि गौतमेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष यानी चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। सावन में यहां दर्शन और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।
मंदिर की जमीन पर था नवाब का कब्जा
मंदिर से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार करीब दो सौ वर्ष पहले इसकी भूमि पर एक नवाब का कब्जा था। श्रद्धालु गौतमेश्वर महादेव के दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मंदिर जाने से रोका जाने लगा।
यह बात तत्कालीन काशी नरेश तक पहुंची। मंदिर के पुजारी के अनुसार महाराज प्रभु नारायण सिंह अपने मंत्री के साथ वहां पहुंचे और नवाब से मंदिर की भूमि का मूल्य पूछा। नवाब जमीन देने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद मंदिर की भूमि को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।
तीन बार मुकदमा हारे काशी नरेश
लोकमान्यता के अनुसार काशी नरेश ने मंदिर की भूमि के लिए मुकदमा लड़ा, लेकिन लगातार तीन बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने गौतमेश्वर महादेव के सामने अपनी व्यथा रखी और संकल्प लिया कि अब यदि वे मुकदमा हारे तो इसे बाबा की हार माना जाएगा।
इसी प्रसंग से गौतमेश्वर महादेव की एक और अद्भुत मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि शिवलिंग को वहां से हटाने के उद्देश्य से जब उसके आसपास खुदाई शुरू की गई तो वह समाप्त होने के बजाय नीचे तक विशाल मिलता गया। जितनी गहराई तक खुदाई हुई, शिवलिंग का स्वरूप उतना ही विस्तृत दिखाई दिया। आखिरकार उसे हटाया नहीं जा सका।
बदले हालात और मंदिर की जमीन काशी नरेश को मिली
प्रचलित कथा के अनुसार इसी दौरान नवाब के परिवार और संपत्ति की परिस्थितियां भी बदलती चली गईं। नवाब की मृत्यु के बाद परिवार में एक महिला और बच्ची रह गईं। अंततः महिला ने मंदिर की भूमि पर अपना दावा छोड़ दिया और जमीन काशी नरेश को मिल गई। इस पूरे प्रसंग को श्रद्धालु गौतमेश्वर महादेव की कृपा और काशी नरेश की अटूट आस्था से जोड़कर देखते हैं।
चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति की मान्यता
आज भी गौतमेश्वर महादेव का मंदिर गोदौलिया क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह प्राचीन शिवालय विशेष महत्व रखता है।
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक गौतमेश्वर महादेव का दर्शन, पूजन और जलाभिषेक करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
गौतमेश्वर महादेव मंदिर आज काशी की पौराणिक परंपरा के साथ उस लोककथा को भी जीवंत रखे हुए है, जिसमें एक राजा की आस्था, लंबी कानूनी लड़ाई और महादेव से जुड़ी अद्भुत मान्यता एक साथ दिखाई देती है।

