काशी में यहां राजा मनु ने स्थापित किया था पहला मानव-स्थापित शिवलिंग, मिलता है वंशवृद्धि का आशीर्वाद
वाराणसी। काशी में भगवान शिव के असंख्य स्वरूपों के साथ उनसे जुड़ी अलग-अलग मान्यताएं भी श्रद्धालुओं की आस्था का आधार हैं। इन्हीं में मन्विश्वर महादेव का विशेष स्थान है। मान्यता है कि यह धरती पर किसी मनुष्य द्वारा स्थापित पहला शिवलिंग है। आदि पुरुष माने जाने वाले राजा मनु ने कठोर तपस्या के बाद इस शिवलिंग की स्थापना की थी। मन्विश्वर महादेव की आराधना को वंशवृद्धि और संतान सुख से भी जोड़ा जाता है।
राजा मनु ने तपस्या कर स्थापित किया था शिवलिंग
पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा मनु ने काशी में भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें इसी स्थान पर साक्षात दर्शन दिए। इसके बाद मनु द्वारा यहां शिवलिंग स्थापित किए जाने की मान्यता है, जिसे मन्विश्वर महादेव के नाम से जाना गया।
अविमुक्तेश्वर महादेव को जहां स्वयं भगवान शिव द्वारा स्थापित आदि शिवलिंग माना जाता है, वहीं मन्विश्वर महादेव को किसी मनुष्य द्वारा स्थापित प्रथम शिवलिंग की मान्यता प्राप्त है।
सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रांगण में विराजमान हैं महादेव
मन्विश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रांगण में स्थित है। धार्मिक ग्रंथों में भी इस शिवलिंग की प्राचीनता और महत्ता का उल्लेख बताया जाता है।
कृत्यकल्पतरु और लिंगपुराण के अध्याय 15 के उल्लेख के अनुसार वैद्यनाथ के नैऋत्य यानी दक्षिण-पश्चिम दिशा में मनु महाराज द्वारा स्थापित शिवलिंग का वर्णन मिलता है। शिवलिंग को पूर्वमुखी तथा इससे संबंधित कुंड को दक्षिण दिशा में स्थित बताया गया है। स्कंदपुराण के काशी खंड में भी इस स्थान के वर्णन की मान्यता है।
संतान सुख और वंशवृद्धि के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
मन्विश्वर महादेव की सबसे प्रमुख धार्मिक मान्यता वंशवृद्धि से जुड़ी है। भक्तों का विश्वास है कि श्रद्धा के साथ बाबा का पूजन और अभिषेक करने से वंश की वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
विशेष रूप से संतान सुख की कामना रखने वाले श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से एक लोटा जल अर्पित कर महादेव से की गई प्रार्थना भी फलदायी होती है।
काशी में जीवंत है मनु और महादेव की प्राचीन कथा
काशी में मन्विश्वर महादेव की महत्ता केवल एक प्राचीन शिवालय के रूप में नहीं है। यह स्थान मनु की तपस्या, भगवान शिव के दर्शन और मानव द्वारा शिवलिंग स्थापना की प्राचीन मान्यता को एक सूत्र में जोड़ता है।
सदियों से चली आ रही आस्था के बीच मन्विश्वर महादेव आज भी उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आराध्य हैं, जो संतान सुख और वंशवृद्धि की कामना लेकर बाबा की शरण में पहुंचते हैं।

