Jitiya Vrat 2023: जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन 16 की मात्रा में ही अर्पित करनी चाहिए पूजन सामग्री

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हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत व त्योहार का खास महत्व होता है और उस दिन विशेष तौर पर पूजा-पाठ की जाती है। अधिकतर व्रत घर की खुशहाली और संतान की सुख-समृद्धि के लिए रखे जाते हैं। जिनमें से ए​​क जीवित्पुत्रिका व्रत जो कि हर साल अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका के अलावा जितिया के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन महिलाएं अपने संतान प्राप्ति की कामना के साथ ही संतान की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत बहुत ही कठिन माना गया है क्योंकि इस दिन महिलाएं 24 घंटे निर्जला व्रत रखती हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन पूजन सामग्री में हर 16 की मात्रा का विशेष महत्व होता है। 

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 शुभ मुहूर्त
 पंचांग के अनुसार इस साल 6 अक्टूबर 2023, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। यह व्रत मुख्य तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में रखा जाता है। यह व्रत तीन दिन तक चलता है। 5 अक्टूबर को नहाय खाय होगा, फिर 6 अक्टूबर को ​जितिया व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 7 अक्टूबर को व्रत का पारण होगा। पारण का समय सुबह 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। 

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जितिया व्रत की पूजन सामग्री
जितिया व्रत में उपयोग होने वाली पूजन सामग्री में 16 की मात्रा का खास महत्व होता है। क्योंकि पूजा की सामग्री में हर चीज 16 होती है।  इस दिन पूजा के दिन माता रानी को 16 पेड़े, 16 दूब की माला, 16 खड़ा चावल, 16 गांठ का धागा, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 पान, 16 खड़ी सुपारी व श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है। ऐसा करना शुभ माना गया है। 

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जितिया व्रत का महत्व
जितिया व्रत विशेष तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में मनाया जाता है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र और घर में सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इसके अलावा कहते हैं कि अगर किसी दंपति को संतान नहीं है और वह काफी समय से संतान की कामना कर रहे हैं तो उन्हें जितिया व्रत करना चाहिए। इस व्रत को रखने से संतान सुख की मनोकामना पूरी होती है लेकिन यह व्रत तभी फलदायी होता है जब इसके सभी नियमों का विधि-विधान से पालन किया जाए। 

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