Chaitra Navratri 2024: नवरात्र में लगती है पाकिस्तान के इस मंदिर में लोगों की भीड़, कई देशों से आते हैं श्रद्धालु

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पाकिस्तान के इस मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान भव्य आयोजन देखने को मिलता है। साल में 2 बार पड़ने वाली नवरात्रि में लोग यहां पाकिस्तान ही नहीं बल्कि अन्य देशों से भी लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात ये हैं कि दुनिया के 51 शक्तिपीठों में से एक हिंगलाज माता मंदिर में हमेशा नवरात्रि की ही तरह जश्न मनाया जाता है।जैसे भारत में नवरात्रि के मौके पर उत्सव मनाया जाता है। कई बार लोगों को लगता है कि ये मंदिर आखिरकार भारत में है या पाकिस्तान में। इस मंदिर में नवरात्रि में गरबा से लेकर कन्या भोज तक सभी तरह के आयोजन किए जाते हैं। 

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हिंगलाज मंदिर जिस एरिया में है, वो पाकिस्तान के सबसे बड़े हिंदू बाहुल्य वाले इलाकों में से एक है। चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां भव्य मेला भी लगता है और माता के दर्शन के लिए भाड़ी भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा यहां दर्शन के लिए आई महिलाएं गरबा करती हैं। विधि-विधान से हवन, पूजा करती है। इसके अलावा कन्याओं को भोजन भी खिलाया जाता है और मां के भक्ति गानों की गूंज दूर-दूर तक लोगों को सुनाई देती है। 

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ऐसा माना जाता है कि हिंगलाज की यात्रा करना अमरनाथ से ज्यादा कठिन है। फिर भी लोग यहां पर दूर-दूर से माता के दर्शन के लिए आते हैं और नवरात्रि के दिनों में इस मंदिर में इतनी भीड़ हो जाती है कि लोगों को संभालना मुश्किल हो जाता है।  नवरात्रि के दिनों में भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए यहां खास इंतजाम भी किए जाते हैं ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए मुश्किलों का सामना न करना पड़े। 

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हिंदू-मुस्लिम का नहीं दिखता कोई फर्क
नवरात्रि के दिनों में भी इस मंदिर में हिंदू-मुस्लिम का कोई फर्क देखने को नहीं मिलता है। कई बार पुजारी-सेवक मुस्लिम टोपी पहने हुए दिखते हैं। वहीं, मुस्लिम भाई देवी माता की पूजा के दौरान साथ खड़े हुए मिलते हैं। इनमें से अधिकतर बलूचिस्तान-सिंध के लोग होते हैं। हर साल पड़ने वाले 2 नवरात्रों में यहां सबसे ज्यादा भीड़ होती है। हजारों की संख्या में भक्त रोज माता के दर्शन करने हिंगलाज मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। 

इस मंदिर में पूजा में पाकिस्तान, बांग्लादेश के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन लोग भी शामिल होते हैं। हिंगलाज मंदिर को मुस्लिम ‘नानी बीबी की हज’ या पीरगाह के तौर पर मानते हैं, इसलिए पीरगाह पर अफगानिस्तान, इजिप्ट और ईरान के लोग भी इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। 

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