क्या है महाकुंभ में स्नान की सही तरीका? कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलती

WhatsApp Channel Join Now

सनातन धर्म के सबसे बड़े स्नान पर्व मकर संक्रांति पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगे महाकुंभ 2025 में करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों ने स्नान किया है। इससे पहले पौष पूर्णिमा पर भी करीब ढाई करोड़ लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इस कड़ाके की ठंड में लोग बड़े श्रद्धा भाव से महाकुंभ में डुबकी तो लगा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोग अनजाने में स्नान के लिए बनाए गए नियमों की अवहेलना करते नजर आ रहे हैं। इसकी वजह से लोग ना केवल ठंड की चपेट में आ जा रहे हैं, बल्कि कुछ लोगों को जान तक गंवानी पड़ी हैं। 

महाकुंभ के जल से घर बैठे भी कर सकते हैं स्नान, इस तरह मंगवा सकते हैं पवित्र  जल, होगी महाफल की प्राप्ति - India TV Hindi

ऐसे में यदि आप भी महाकुंभ स्नान के लिए जा रहे हैं तो यह बहुत जरूरी है कि आप सबसे पहले स्नान की विधि को समझ लें। सनातन संस्कृति में प्राचीन काल से ही स्नान को जीवन शैली का प्रमुख हिस्सा माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक यह केवल एक शारीरिक क्रिया भर नहीं है, बल्कि स्नान में धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक अंश भी समाहित हैं। मनु स्मृति में स्नान को शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए आवश्यक माना गया है। मनु स्मृति में प्रसंग आता है कि ‘स्नानमूलाः क्रियाः सर्वाः श्रुतिस्मृत्युदिता नृणाम्। तस्मात् स्नानं निषेवेत श्रीपुष्ट्यारोग्यवर्धनम्॥’ अर्थात श्रीपुष्टि एवं आरोग्य की चाहने वाले को नियमित स्नान करना ही चाहिए। 

वर्जित है गंगा में नग्न स्नान और जलक्रीणा
इसी ग्रंथ में आगे कहा गया है कि ‘नित्यं स्नात्वा शुचिः कुर्याद्देवर्षिपितृतर्पणम्।’ मतलब यह कि स्नान के बाद ही आप संध्यावंदन, तर्पण आदि का कर्म कर सकते हैं। अब सवाल उठता है कि स्नान करें कैसे? इसके लिए मनु स्मृति के अलावा विश्वामित्र स्मृति में कई विधान मिलते हैं। इन सभी ग्रंथों में साफ तौर पर किसी भी जलाशय में नग्न स्नान को मना किया गया है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि स्नान कोई जलक्रीणा की चीज नहीं है। बल्कि यह तन और मन की शुद्धि की एक विधि है। 

महाकुंभ, अर्ध कुंभ और पूर्ण कुंभ में क्या है अंतर, जानिए क्यों है इनमें  इतना फर्क

महाकुंभ में धोएं मन का मैल
किसी भी पवित्र सरोवर या नदी में स्नान करने के लिए व्यक्ति को पहले अपने घर से ही शरीर का मैल धोकर जाना चाहिए। सरोवर में डुबकी तो मन का मैल धोने के लिए लगाई जाती है। इसी प्रकार महाकुंभ या गंगा में स्नान के समय मूसल की तरह व्यवहार करना चाहिए। जैसे कि मूसल को सरोवर में फेंका जाए तो वह एक बार डूबकर तुरंत बाहर निकल आता है। ठीक ऐसे ही आदमी को तीन बार डुबकी लगानी चाहिए। पहली डुबकी अपने कल्याण के लिए, दूसरी डुबकी माता-पिता और तीसरी डुबकी गुरु के लिए लगानी चाहिए। 

ठंड से भी होता है बचाव
चाहें ठंड का मौसम हो या गर्मी का, कभी भी सरोवर में स्नान करें तो पहले घुटने भर पानी में जाकर आचमन करें। इसके बाद जल को अपने सिर एवं शरीर के बाकी हिस्से में छिड़कें इतना भर करने से वातावरण के मुताबिक हमारे शरीर का तापमान मेंटेन हो जाता है। इसके बाद विष्णु मंत्र का जाप करते हुए पवित्र जलाशय में डुबकी लगाना चाहिए। ऐसा करने से आदमी को भौतिक और पारलौकिक सुख की अनुभूति होती है। सभी ग्रंथों में पानी के अंदर अठखेलियां करने से मना किया गया है। 

Share this story