Vastu Upay: घर की नकारात्मकता को दूर कर सकता है डमरू, जानें वास्तु उपाय

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वास्तु शास्त्र में ध्वनि का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो नकरात्मकता को सोख लेती है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं। भगवान शिव का डमरू इन्हीं में से एक है। डमरू की आवाज से वातावरण भी शुद्ध हो जाता है। इसलिए अक्सर लोग इसे अपने घर के मंदिर में रखते हैं। आप भी घर की नकारात्मकता को दूर करने के लिए डमरू को घर में रख सकती हैं। एस्ट्रोलॉजर और वास्तु एक्सपर्ट रिद्धि बहल ने इसकी सही दिशा और नियमों के बारे में बताया है।

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नकारात्मकता दूर करता है डमरू

अगर आपको घर में भारीपन महसूस होता है, तो सुबह और शाम पूजा के समय डमरू बजाएं। इसकी ध्वनि तरंगें घर के कोनों में जमी नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकाल देती हैं। इसे बजाने से घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है। इसलिए आपको इसे घर में जरूर रखना चाहिए।

बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने के लिए डमरू का उपाय

वास्तु के अनुसार, डमरू की ध्वनि बच्चों के मस्तिष्क के लिए बहुत प्रभावशाली होती है। अगर बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है, तो इसके लिए उसके कमरे में आप डमरू को रख दें। यह शुभ माना जाता है। साथ ही इसकी आवाज मन को शांत करती है। इसलिए यह उपाय काफी फलदायी होता है।

आर्थिक तंगी और सफलता के लिए डमरू का वास्तु उपाय

किस्मत के बंद ताले खोलने के लिए डमरू को घर के मंदिर या ईशान कोण में स्थापित करें। नियमित रूप से शिव आराधना के साथ इसे बजाने से व्यापार और करियर में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और धन आगमन के नए स्रोत बनते हैं। इसलिए इसे आप रख सकती हैं। साथ ही घर की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्कम कर सकती हैं।

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डमरू रखते समय किन नियमों का करें पालन?

डमरू को हमेशा घर के उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
डमरू को कभी भी गंदे हाथों से न छुएं और इसे जमीन पर रखने के बजाय किसी साफ कपड़े या स्टैंड पर रखें।
इसका लाभ तभी मिलता है जब आप इसे श्रद्धा के साथ नियमित रूप से बजाते हैं।
डमरू टूटा हुआ या खंडित नहीं होना चाहिए। खंडित डमरू घर में नकारात्मकता ला सकता है।

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