Shattila Ekadashi 2026: एक तिथि, छह तिल उपाय, आखिर क्यों खास है षटतिला एकादशी?

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 हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है. वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में षटतिला एकादशी को खास स्थान प्राप्त है. यह एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है और इसका संबंध केवल व्रत से ही नहीं, बल्कि तिल से जुड़े छह विशेष धार्मिक उपायों से भी है. इन्हीं छह तिल कर्मों के कारण इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है.

क्यों पड़ा नाम षटतिला एकादशी?
संस्कृत में षट का अर्थ होता है छह और तिला का अर्थ है तिल. शास्त्रों के अनुसार इस दिन तिल से जुड़े छह अलग-अलग पुण्य कर्म करने का विधान है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इन छह तिल उपायों को श्रद्धा से करता है, उसके पापों का नाश होता है और उसे धन, आरोग्य व मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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शास्त्रों में मिलता है स्पष्ट उल्लेख
पद्म पुराण और धर्मसिंधु जैसे ग्रंथों में षटतिला एकादशी का विस्तृत वर्णन मिलता है. पद्म पुराण के अनुसार माघ मास में तिल का दान और प्रयोग करने से व्यक्ति को हजारों गोदान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. यही कारण है कि इस एकादशी को विशेष रूप से तिल प्रधान एकादशी कहा गया है.

ये हैं तिल से जुड़े छह उपाय
शास्त्रों के अनुसार षटतिला एकादशी के दिन ये छह तिल कर्म करने चाहिए.

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तिल से स्नान: तिल मिले जल से स्नान करने से पापों का क्षय होता है.
तिल का उबटन: शरीर पर तिल का उबटन लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
तिल हवन : तिल से हवन करने से देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
तिल का दान: जरूरतमंदों को तिल दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है.
तिल का सेवन: तिल से बने पदार्थ ग्रहण करने से स्वास्थ्य लाभ होता है.
तिल से तर्पण : पितरों के निमित्त तिल से तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है.
इन्हीं छह कर्मों के कारण इस एकादशी का नाम षटतिला पड़ा.

षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति को दरिद्रता से मुक्ति मिलती है. भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और किए गए पाप नष्ट होते हैं. कई ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि यह एकादशी यमलोक के भय से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है.

क्यों माघ मास में तिल का महत्व बढ़ जाता है?
माघ मास को तप, दान और स्नान का महीना कहा गया है. इस समय तिल को ऊष्ण और पवित्र माना जाता है. ठंड के मौसम में तिल शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी विशेष फलदायी होता है.

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