Sawan Shivratri 2026: 11 अगस्त को है सावन शिवरात्रि, बन रहे हैं दुर्लभ योग … नोट कर लें पूजा का सही मुहूर्त
सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है. इस साल 11 अगस्त 2026 को पड़ने वाली सावन शिवरात्रि कई शुभ संयोगों के कारण और भी विशेष बनने जा रही है. इस दिन सिद्धि योग और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसे योगों में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य मिलता है. साथ ही नए संकल्प लेने और रुके हुए कामों की शुरुआत के लिए भी यह समय बहुत शुभ माना जाता है.

सावन शिवरात्रि 2026 का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी. इस दिन पूजा के लिए कई शुभ संयोग बन रहे हैं. सिद्धि योग 11 अगस्त को सुबह से शुरू होकर शाम 6:51 बजे तक रहेगा. वहीं पुनर्वसु नक्षत्र सूर्योदय से लेकर सुबह 10:09 बजे तक रहेगा. ऐसे में पूरे दिन भगवान शिव की पूजा और अभिषेक का विशेष महत्व रहेगा.
सिद्धि योग क्यों माना जाता है इतना शुभ?
ज्योतिष शास्त्र में सिद्धि योग को बहुत शुभ और सफलता प्रदान करने वाला योग माना गया है. मान्यता है कि इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, जप, तप, दान और नए कार्यों की शुरुआत सफल होती है. यदि कोई व्यक्ति इस समय भगवान शिव का रुद्राभिषेक करता है या सच्चे मन से कोई संकल्प लेता है, तो उसके पूर्ण होने की संभावना अधिक मानी जाती है. यही कारण है कि सावन शिवरात्रि पर सिद्धि योग का संयोग भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है.

पुनर्वसु नक्षत्र का क्या है महत्व?
पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, जबकि इसकी अधिष्ठात्री देवी माता अदिति हैं. यह नक्षत्र पुनर्निर्माण, नई शुरुआत, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि शिवरात्रि के दिन पुनर्वसु नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा की जाए तो मानसिक शांति प्राप्त होती है, जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बढ़ती है. जिन लोगों के जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हों, उनके लिए भी यह नक्षत्र शुभ माना जाता है.

सावन शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सावन शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करें. भगवान शिव को धतूरा, भांग, सफेद चंदन, अक्षत और फल भी अर्पित किए जा सकते हैं. पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है. शाम के समय शिव मंदिर में दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.

