Sankashti Chaturthi 2025 : गणेश चतुर्थी आज, इस दिन ना दिखाई दे चंद्रमा तो क्या करें?

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हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि गणेश जी की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. आज 12 अगस्त को बहुला चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है. इस व्रत को रखने से परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है.

 भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को हेरम्ब संकष्टी के रूप में मनाया जाता है. हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के 32 रूपों में से एक हेरम्ब गणपति स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है. भगवान हेरम्ब को पांच शीष और दस भुजाओं वाले देवता के रूप में पूजा जाता है. हेरम्ब 'असहाय एवं निर्बलों की रक्षा करने वाले हैं.

 भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को हेरम्ब संकष्टी के रूप में मनाया जाता है. हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के 32 रूपों में से एक हेरम्ब गणपति स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है. भगवान हेरम्ब को पांच शीष और दस भुजाओं वाले देवता के रूप में पूजा जाता है. हेरम्ब 'असहाय एवं निर्बलों की रक्षा करने वाले हैं.

संकष्टी चतुर्थी के व्रत के दिन रात्रि के समय चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है. इस दिन चंद्रोदय का समय रात में 8.59 मिनट रहेगा. इस दिन अगर इस दिन अगर चंद्रमा दिखाई न दें तो व्रत करने वाले किस विधि से इस दिन पूजा करें.

संकष्टी चतुर्थी के व्रत के दिन रात्रि के समय चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है. इस दिन चंद्रोदय का समय रात में 8.59 मिनट रहेगा. इस दिन अगर इस दिन अगर चंद्रमा दिखाई न दें तो व्रत करने वाले किस विधि से इस दिन पूजा करें.

अगर इस दिन किसी कारण से चंद्रमा नहीं दिखाई दे तो सबसे पहले चंद्रमा निकले के शुभ मुहूर्त पर ही पूजा-अर्चना करें.

अगर इस दिन किसी कारण से चंद्रमा नहीं दिखाई दे तो सबसे पहले चंद्रमा निकले के शुभ मुहूर्त पर ही पूजा-अर्चना करें.

चंद्रमा ना निकलने पर भगवान शिव के मस्तक में विराजमान चंद्र के दर्शन करें और चंद्रमा निकलने की दिशा में मुख करके चंद्र देव को अर्घ्य दें.

चंद्रमा ना निकलने पर भगवान शिव के मस्तक में विराजमान चंद्र के दर्शन करें और चंद्रमा निकलने की दिशा में मुख करके चंद्र देव को अर्घ्य दें.

चंद्र देव से क्षमा याचना मांगे और अपनी मनोकामना उनके समक्ष रखकर, उनकी विधि पूर्वक पूजा करें और भोग लगाकर व्रत का पारण करें.

चंद्र देव से क्षमा याचना मांगे और अपनी मनोकामना उनके समक्ष रखकर, उनकी विधि पूर्वक पूजा करें और भोग लगाकर व्रत का पारण करें.

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