Phalgun Amavasya Pitra Dosh Upay: क्या आपकी कुंडली में भी है पितृ दोष? फाल्गुन अमावस्या पर करें ये 5 उपाय, नाराज पूर्वज हो जाएंगे प्रसन्न
हिंदू धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष महत्व है और इस दिन पितरों की पूजा का भी विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन पूर्वजों की शांति के उपाय करता है और पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करता है उसे किसी भी तरह के पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है और इससे समस्त पापों का नाश होता है। ज्योतिष में मान्यता है कि इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और यदि आप इस दिन पिंडदान करने के साथ कुछ आसान ज्योतिष उपाय भी आजमाते हैं तो पितृ दोषों को दूर किया जा सकता है। इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। आइए जानें ऐसे कुछ उपायों के बारे में जो आपकी कुंडली में मौजूद पितृ दोषों को दूर करने में मदद कर सकते हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए भी जरूरी हैं।
पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण करें
फाल्गुन अमावस्या के दिन यदि आप पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं तो यह पितृ दोष मुक्ति का सर्वश्रेष्ठ उपाय माना गया है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर जाकर तर्पण करें। तर्पण के लिए तिल, जल, कुश और पुष्प मिलाकर पूर्वजों का स्मरण करते हुए इसे नदी या जल में प्रवाहित करें। इससे आपको किसी भी तरह के पितृ दोष को दूर करने में मदद मिल सकती है और पूर्वजों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
पितृ स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ
फाल्गुन अमावस्या के दिन पितृ स्तोत्र, पितृ सूक्त या पितृ कवच का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। जो लोग नियमित रूप से पितृ प्रार्थना करते हैं, उनके जीवन में स्थिरता और मानसिक शांति बढ़ती है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करें और इस स्तोत्र का पाठ करें। इस उपाय से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और आपके जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर हो सकती हैं।

घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों के नाम का दीपक जलाएं
ऐसा माना जाता है कि घर की दक्षिण दिशा में यम और पूर्वजों का वास होता है और यदि आप फाल्गुन अमावस्या के दिन इसी दिशा में पूर्वजों के नाम से सरसों के तेल का दीपक जलाएं तो आपको किसी भी तरह के पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है। यही नहीं यह पूर्वजों की नाराजगी दूर करके उन्हें प्रसन्न करने का भी एक आसान उपाय है।
पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं
फाल्गुन अमावस्या के दिन यदि आप पीपल के पेड़ में जल चढाएंगी और पूर्वजों की शांति की प्रार्थना करेंगी तो आपको कई तरह के पितृ दोषों से निकलने में मदद मिल सकती है। फाल्गुन अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना पितृ शांति के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावशाली उपाय माना जाता है। शास्त्रों में पीपल को देववृक्ष कहा गया है और इसमें पितरों का वास भी माना जाता है। इसी वजह से यदि आप किसी भी अमावस्या तिथि के दिन पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं तो आपके पितृ दोष दूर हो सकते हैं।
जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं
फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए यदि आप ब्राह्मणों को दान देती हैं तो यह पितृ दोषों से मुक्ति का एक अच्छा उपाय माना जाता है। इस दिन आप जरूरतमंद या ब्राह्मणों को भोजन अवश्य करें और दान में उनकी जरूरत की चीजें दें। इस दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें। मान्यता है कि इससे आपको पितृ दोषों से मुक्ति मिल सकती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

