Phalgun Amavasya 2025 Date: कब है फाल्गुन अमावस्या? जानें पूजा से लेकर स्नान-दान का मुहूर्त और महत्व

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हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यूं यह तिथि किसी भी अच्छे या मांगलिक कार्य के लिए अशुभ होती है लेकिन धार्मिक कार्यों के लिए इस तिथि को बहुत ख़ास गया है। पंचांग के अनुसार, साल में कुल 12 अमावस्या तिथियां पड़ती हैं। इन्हीं में से एक है फाल्गुन माह की अमावस्या। ऐसे में  आइये जानते हैं कि इस साल कब पड़ रही है फाल्गुन अमावस्या, क्या है इस दिन पूजा से लेकर स्नान-दान तक का मुहूर्त एवं इसका महत्व।

Falgun amavasya 2025 date muhurta and significance

फाल्गुन अमावस्या 2025 कब है?

फाल्गुन अमावस्या तिथि का आरंभ 27 फरवरी, दिन गुरुवार को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 28 फरवरी, दिन शुक्रवार को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या की पूजा 27 फरवरी को की जाएगी।

फाल्गुन अमावस्या 2025 शुभ मुहूर्त

फाल्गुन अमावस्या के दिन यानी कि 27 फरवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 9 मिनट से आरंभ होगा और सुबह 5 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त की शुरुआत शाम 6 बजकर 7 मिनट से होगी और इसका समापन शाम 6 बजकर 42 मिनट पर हो जाएगा।
इसके अलावा, इस दिन निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 8 मिनट से शुरू होगा और देर रात 12 बजकर 58 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इस दिन शिव योग और सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। साथ ही, अभिजीत मुहूर्त एवं अमृत काल का भी संयोग बनने वाला है।

फाल्गुन अमावस्या के दिन शिव योग सुबह 5 बजकर 9 मिनट से रात 11 बजकर 40 इनत तक रहेगा। वहीं, सिद्धि योग रात 11 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तक चलेगा। ब्रह्म मुहूर्त के अलावा, शिव योग के दौरन भी स्नान-दान करना इस दिन शुभ सिद्ध होगा।
वहीं, पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ है जो दोपहर 12 बजकर 16 मिनट से 1 बजकर 2 मिनट तक है। इसके अलावा, अमृत काल इस दिन सुबह 6 बजकर 2 मिनट से सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। ये दोनों ही मुहूर्त पूजा के लिए बेहद शुभ और लाभकारी हैं।

Falgun amavasya 2025 date shubh muhurta and importance

फाल्गुन अमावस्या

फाल्गुन अमावस्या के दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से बहुत पुण्य मिलता है। इस दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा, पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।

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