Parijat Plant: क्या दरवाजे के बाहर पारिजात का पौधा लगाना शुभ या अशुभ? जानें पौराणिक मान्यताएं

WhatsApp Channel Join Now

 पारिजात के फूल बेहद खूबसूरत होते हैं. इसका केसरिया तना और सफेद पंखुड़ियां इसे विशेष रूप से आकर्षक बनाती हैं. अंग्रेजी में ‘नाइट ब्लूमिंग जैस्मीन’ या आम भाषा में ‘रात की रानी’ के नाम से मशहूर पारिजात का पौधा औषधीय और वास्तु के नजरिए से बहुत फायदेमंद और सजावटी पौधा है. ये आकर्षक पौधे होम्योपैथी और आयुर्वेद में आम तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं और अपनी पत्तियों और फूलों की सुंदरता के लिए उगाए जाते हैं.वास्तु के हिसाब से घर में लगाए जाने वाले पारिजात के पौधे पर छोटे सफेद फूल लगते हैं. ये फूल सितंबर के आखिर में खिलना शुरू होते हैं और दिसंबर तक खिलते रहते हैं. इस पौधे के फूल आम तौर पर देर शाम या रात में खिलते हैं और आस-पास तेज खुशबू फैलाते हैं. पारिजात के पौधे से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है.

पारिजात के पौधे को लेकर पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण पारिजात के पौधे को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाए थे, लेकिन सत्यभामा और रुक्मिणी के बीच इस बात पर मतभेद था कि पारिजात का पौधा कहां लगाया जाए. तब कृष्ण ने एक तरकीब अपनाई और पौधे को सत्यभामा के आंगन में इस प्रकार लगाया कि उसके फूल रुक्मिणी के आंगन में गिरें. घर में पारिजात का पौधा लगाना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल बहुत प्रिय हैं. एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि देवी लक्ष्मी वहीं निवास करती हैं जहां पारिजात के फूल खिलते हैं. पारिजात के फूलों की सुगंध बहुत मनमोहक होती है.

किस दिशा में लगाएं पारिजात का पौधा
घर में या मुख्य द्वार के पास पारिजात का पौधा होने से इसकी सुगंध तनाव को कम करती है और मन को शांति प्रदान करती है. ऐसा माना जाता है कि घर के आसपास पारिजात का पौधा होने से वास्तु दोष कम होते हैं और परिवार में सुख, शांति और आनंद का वातावरण बना रहता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पारिजात का पौधा लगाने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है. इस दिशा में पारिजात को लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है.

Share this story