Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी आज, जानें श्री हरि विष्णु की पूजा का शुभ समय और विधि

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आज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत है. ये साल का सबसे बड़ा और पुण्यदायी एकादशी व्रत माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल प्रदान कर देती है. आज भक्त निर्जला उपवास रखे हुए हैं. इस व्रत का पारण कल यानी 26 जून को किया जाएगा. निर्जला एकादशी के व्रत का महत्व महाभारत और अनेक पुराणों में बताया गया है.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की इस एकादशी का व्रत रखकर पांडु पुत्र भीम ने सभी एकादशी व्रतों के पुण्य फल प्राप्त किए थे. इस दिन निर्जला उपवास रखने के साथ-साथ भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा भी की जाती है. मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा और व्रत व्यक्ति की आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आज विष्णु जी का पूजन का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है? साथ ही जानते हैं पूजा की विधि.

निर्जला एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त 
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर प्रारंभ होगा और पूजा का ये शुभ मुहूर्त दोपहर में 02 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. इस समय में पूजा करना बहुत लाभकारी होगा.

निर्जला एकादशी शुभ समय 
आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 05 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तक रहा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. रवि योग आज सुबह 05 बजकर 25 मिनट पर शुरू हुआ. ये योग शाम को 04 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा सुबह 10 बजकर 53 मिनट से देर रात तक सिद्ध योग का प्रभाव रहने वाला है. सिद्ध योग बनने से पहले शिव योग सक्रिय रहेगा. गुरुवार और एकादशी का संयोग भी आज है.

निर्जला एकादशी पूजा विधि 
निर्जला एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और व्रत-पूजा का संकल्प लें.
इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं.
उस पर विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा रखें. दोनों की संयुक्त पूजा करें.
भगवान को धूप, दीप, फल और पीले रंग की मिठाई या पकवान का भोग लगाएं.
भगवान को खीर में तुलसी दल डालकर भी भोग लगा सकते हैं.
निर्जला एकादशी के व्रत की कथा पढ़ें.
बैठकर विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें.
अंत में मां लक्ष्मी और विष्णु जी की आरती उतारें.

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