Mauni Amavasya Dan 2026: अन्न दान या वस्त्र दान… मौनी अमावस्या पर कौन-सा दान है सबसे श्रेष्ठ?

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सनातन धर्म में मौनी अमावस्या को दान, संयम और आत्मशुद्धि का विशेष पर्व माना गया है. वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से प्रारंभ होकर 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी. इस दिन गंगा स्नान, मौन साधना और दान का विशेष महत्व बताया गया है. शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि मौनी अमावस्या पर किया गया दान कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है. ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में यह प्रश्न उठता है कि इस दिन अन्न दान श्रेष्ठ है या वस्त्र दान. धार्मिक दृष्टि से दोनों दानों का अपना-अपना महत्व और फल बताया गया है.

मौनी अमावस्या को अमावस्या तिथि का विशेष स्वरूप माना गया है, जो पितृ स्मरण और साधना से गहरे रूप में जुड़ा है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान सीधे पुण्य खाते में जुड़ता है और उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है. दान का उद्देश्य केवल वस्तु देना नहीं, बल्कि करुणा, आभार और सेवा भावना को जगाना होता है. मौनी अमावस्या पर दान करने से आत्मशुद्धि होती है और मन के विकार शांत होते हैं. यह दिन संग्रह की भावना से हटकर जरूरतमंदों की सहायता करने का अवसर प्रदान करता है. इसी कारण इस तिथि पर अन्न, वस्त्र, तिल, कंबल और धन दान को विशेष पुण्यकारी माना गया है.

अन्न दान को क्यों माना गया है सर्वोत्तम?
धार्मिक ग्रंथों में अन्न दान को सभी दानों में श्रेष्ठ बताया गया है. मान्यता है कि अन्न दान से न केवल भूख मिटती है, बल्कि जीवन रक्षा का पुण्य भी प्राप्त होता है. मौनी अमावस्या पर अन्न दान करने से पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष शांति का मार्ग प्रशस्त होता है. अन्न को प्राण का आधार माना गया है, इसलिए इसका दान सीधे जीवन से जुड़ा हुआ है. इस दिन गरीबों, साधुओं और जरूरतमंदों को भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना गया है. शास्त्रों में उल्लेख है कि मौनी अमावस्या पर किया गया अन्न दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और घर में सुख, समृद्धि और संतुलन बनाए रखता है.

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वस्त्र दान का आध्यात्मिक फल?
वस्त्र दान भी मौनी अमावस्या पर विशेष महत्व रखता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वस्त्र दान से व्यक्ति को मान, सम्मान और सामाजिक संतुलन का पुण्य प्राप्त होता है. शीत ऋतु में किया गया वस्त्र या कंबल दान विशेष रूप से फलदायी माना गया है. वस्त्र दान केवल शरीर ढकने का साधन नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक भी है. मौनी अमावस्या पर वस्त्र दान करने से दरिद्रता दूर होती है और जीवन में स्थिरता आती है. यह दान व्यक्ति के भीतर करुणा और संवेदनशीलता को विकसित करता है. शास्त्रों में बताया गया है कि वस्त्र दान से पूर्व जन्मों के अभाव और कष्टों का शमन होता है.

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कौन-सा दान है सबसे श्रेष्ठ?
शास्त्रों के अनुसार दान की श्रेष्ठता दानकर्ता की भावना पर निर्भर करती है. यदि किसी के पास अन्न उपलब्ध है, तो अन्न दान सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि यह सीधे जीवन से जुड़ा है. वहीं, ठंड या अभाव की स्थिति में वस्त्र दान अत्यंत पुण्यकारी हो जाता है. मौनी अमावस्या पर सबसे श्रेष्ठ दान वही माना गया है, जो श्रद्धा, मौन और करुणा भाव से किया जाए. इस दिन दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सेवा भावना से करना चाहिए. अन्न दान और वस्त्र दान दोनों ही अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं. सही अर्थों में वही दान श्रेष्ठ है, जिससे जरूरतमंद को वास्तविक लाभ मिले और दानकर्ता के मन में विनम्रता और संतोष बना रहे.

 

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