Mahakumbh Last Snan Date: 26 या 27 फरवरी... महाकुंभ का आखिरी स्नान कब है? एक क्लिक में दूर करें कंफ्यूजन!

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महाकुंभ में शाही स्नान जिसे अब अमृत स्नान कहा जाता है, का विशेष महत्व होता है। महाकुंभ भारत के प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम स्थल पर हर 12 साल में आयोजित किया जाता है। इस दौरान दुनिया भर से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और पवित्र त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाकर ईश्वर की कृपा प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाकुंभ में स्नान करने से सभी पापों से छुटकारा मिलता है और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। 

Mahakumbh: महाकुंभ का पहला शाही स्नान कब किया जाएगा? नोट कर लीजिए सही तिथि  और नियम - India TV Hindi
प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत 14 जनवरी से हुई थी, जो कि अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है. महाशिवरात्रि के मौके पर महाकुंभ का आखिरी स्नान किया जाएगा।  इस बार महाशिवरात्रि की तिथि दो दिन पड़ रही है, जिसके चलते लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है कि महाकुंभ में महाशिवरात्रि का स्नान 26 फरवरी को किया जाएगा या 27 फरवरी को, आइए आपके इसी कंफ्यूजन को दूर करते हुए सही तारीख बताते हैं। 

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महाकुंभ का आखिरी स्नान कब है? 
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर होगी। वहीं, इस चतुर्दशी तिथि का समापन 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर होगा।ऐसे में पंचांग को देखते हुए महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाएगी। वहीं, महाशिवरात्रि के मौके पर ही महाकुंभ अंतिम स्नान किया जाएगा और इस स्नान के साथ ही इस महाकुंभ मेले के समापन हो जाएगा। 

Mahakumbh Snan Dates 2025 - Complete Bathing Schedule
महाकुंभ में शाही स्नान का महत्व
हिंदू धर्म में महाकुंभ के अमृत स्नान का अत्यधिक महत्व माना जाता है. महाकुंभ का आखिरी पावन स्नान अनुष्ठान प्रयागराज की पावन धरती में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर किया जाएगा। इस दिन यहां दुनिया भर से श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के लिए इकट्ठा होंगे। ऐसा कहते हैं कि त्रिवेणी पर अमृत स्नान करने से शरीर के साथ आत्मा शुद्धि होती है. साथ ही, आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति भी होती है। 

वहीं, इस दिन महाशिवरात्रि का शुभ संयोग भी रहेगा, जो इस स्नान को और भी ज्यादा दुर्लभ बना रहा है। महाशिवरात्रि का यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यह पर्व महाकुंभ के अमृत स्नान की ऊर्जा और महत्व को और भी ज्यादा बढ़ा रहा है, जिससे भक्तों के जन्मों जन्म के पाप नष्ट हो सकते हैं। 

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