Jitiya Vrat 2026: अन्न तो दूर, पानी की भी एक बूंद नहीं…कब रखा जाएगा 24 घंटे का निर्जला जितिया व्रत?

WhatsApp Channel Join Now

 हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत को जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है. यह व्रत खासतौर पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उन्हें लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है. छठ व्रत की तरह ही जितिया व्रत को कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि कई परंपराओं में माताएं इस दौरान अन्न ही नहीं, बल्कि पानी भी ग्रहण नहीं करती हैं. इसी वजह से इसे 24 घंटे का निर्जला व्रत भी कहा जाता है. आइए जानते हैं, इस साल तीन दिवसीय जितिया व्रत की शुरुआत और समापन किस दिन से हो रहा है.

जितिया व्रत 2026 कब रखा जाएगा?
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है. अष्टमी तिथि की शुरुआत 2 अक्टूबर सुबह 7 बजकर 59 मिनट से होगी और इसका समापन 4 अक्टूबर सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा. इसी दिन माताएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से जितिया का निर्जला व्रत रखेंगी.

तीन दिनों तक चलता है जितिया का पर्व
जितिया को केवल एक दिन का व्रत नहीं माना जाता, बल्कि इसकी पूरी परंपरा तीन दिनों से जुड़ी हुई है. पर्व की शुरुआत 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से होगी. इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान आदि के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं और इसके साथ व्रत की तैयारी शुरू होती है. इसके अगले दिन यानी 3 अक्टूबर को जितिया व्रत रखा जाएगा. इसी दिन माताएं निर्जला उपवास करती हैं. धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दौरान अन्न और पानी का सेवन नहीं किया जाता. पूरे दिन पूजा-पाठ और व्रत से जुड़े धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है. इसके बाद 4 अक्टूबर को पारण के साथ व्रत पूरा किया जाएगा. यानी नहाय-खाय से शुरू होकर निर्जला उपवास और फिर पारण तक जितिया पर्व की तीन दिवसीय परंपरा पूरी होती है.

किन इलाकों में मनाया जाता है जितिया?
जितिया व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों यानी पूर्वांचल में विशेष रूप से मनाया जाता है. इसके अलावा नेपाल के तराई यानी मैदानी इलाकों में भी इस पर्व की खास मान्यता है. मैथिली, भोजपुरी और थारू भाषी समुदायों में जितिया पर्व को विशेष उत्साह के साथ मनाने की परंपरा है. नेपाल में इसे जितिया पावनी के नाम से भी जाना जाता है.

जितिया व्रत में 24 घंटे पानी क्यों नहीं पीती हैं महिलाएं?
जितिया व्रत की सबसे खास बात इसका निर्जला स्वरूप है. व्रत रखने वाली महिलाएं धार्मिक परंपरा के अनुसार अन्न और जल का त्याग करती हैं. लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए निर्जला व्रत के नियमों का सख्त पालन हो ये जरूरी नहीं माना गया है. क्योंकि किसी भी व्रत में धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है.

Share this story