Hartalika Teej: कुंवारी लड़कियां हरतालिका व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें सही नियम

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 भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन पर्व बड़े ही निष्ठा भाव से मनाया जाता है. इस महीने 14 सितंबर के दिन यह कड़ा उपवास रखा जाएगा. आमतौर पर यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए जाना जाता है, लेकिन कुंवारी लड़कियों के मन में अक्सर यह सवाल उठते रहता है कि क्या वे भी यह कड़ा उपवास रख सकती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंवारी लड़कियां अपने लिए मनचाहा, योग्य और संस्कारी वर पाने की इच्छा से तीज का उपवास रख सकती हैं. इस पावन अवसर पर पूजा-पाठ करने और सही नियमों का पालन करने से जीवन में बहुत सुख आता है. आइए जानते हैं कि कुंवारी लड़कियों को इस पावन दिन पर कौन-कौन से नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

माता पार्वती की तपस्या और कुंवारी लड़कियों का नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कुंवारी अवस्था में ही यह कठिन तपस्या की थी. उन्होंने घने जंगल में रहकर रेत का शिवलिंग बनाया था और कठोर नियम पूरे किए थे. इसी कारण से आज भी कुंवारी लड़कियां अपने सुयोग्य जीवनसाथी की कामना के लिए यह उपवास करती हैं. नियम के अनुसार यदि संभव हो तो लड़कियों को निर्जला उपवास ही रखना चाहिए. हालांकि यदि किसी का स्वास्थ्य ठीक न हो या शरीर साथ न दे, तो वे फलाहार भी ले सकती हैं. इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है कि मन में पूरी निष्ठा बनी रहे. सही भाव से नियम पूरा करने पर देवी पार्वती की कृपा हमेशा बनी रहती है.

Hartalika Teej Rules for Unmarried Girls: कुंवारी लड़कियां हरतालिका व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें सही नियम

सुबह का स्नान, वस्त्र का चयन और शिव-पार्वती पूजन
इस पावन दिन पर कुंवारी लड़कियों को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए. इसके बाद उन्हें पीले या हरे रंग के सुंदर वस्त्र पहनने चाहिए, जो इस पर्व के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं. फिर पूजा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति स्थापित करके विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. माता पार्वती को लाल चुनरी और संपूर्ण श्रृंगार सामग्री चढ़ानी चाहिए. इसके साथ ही भगवान शिव को भी फल-फूल अर्पित करने चाहिए. पूरे नियम और लगन से किया गया यह पूजन मन को बहुत शांति देता है. जब लड़कियां स्वच्छ मन से देवी-देवताओं का ध्यान करती हैं, तो उनकी हर अच्छी मनोकामना पूरी होती है और जीवन के सारे कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं.

मन पर संयम, नाम जाप और दान का विशेष महत्व
उपवास वाले दिन अपने व्यवहार और सोच पर ध्यान देना भी बहुत आवश्यक होता है. इस कड़े नियम के दिन किसी पर भी क्रोध करने, किसी की चुगली करने और आलस्य से पूरी तरह बचना चाहिए. दिनभर अपना ध्यान केवल ईश्वर भक्ति में ही लगाए रखना चाहिए और पूरे दिन ॐ नमः शिवाय का जाप करते रहना चाहिए. इसके साथ ही उस पावन दिन पर अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य भी अवश्य करना चाहिए. जरूरतमंदों को चीजें देने से बहुत पुण्य प्राप्त होता है. जो भी कुंवारी लड़की इन सभी बातों का ध्यान रखकर पूरे नियम से यह उपवास पूरा करती है, उसे जीवन में मनचाहा और योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है और खुशहाली बनी रहती है.

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